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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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प्रिय सरोज, तुम्हारा 16 से 18 तक लिखा हुआ पत्र आज अभी मिला। इस महीने में मैंने इन तारीखों को पत्र लिखे हैं-तारीख 1, 9, 15 और चौथा आज लिख रहा हूँ। अब तुमको हर सप्ताह मैं लिखूँगा ही । तुम्हारी तबीयत कमजोर है तब तक चिरंजीव रैहाना मुझे पत्र लिखेगी तो चलेगा। मुझे हर सप्ताह एक पत्र मिलना ही चाहिए। पूज्य बापू जी चाहते हैं तो हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए मुझे अपनी सारी शक्ति उर्दू सीखने के पीछे खर्च करनी चाहिए। तुमको मैंने एक संदेश भेजा था कि तुम उर्दू लिखना सीखो। लेकिन अब तो मेरा एक ही संदेश है-पूरा आराम लेकर पूरी तरह ठीक हो जाओ। तारों के नक्शे बनाने के लिए कंपास बॉक्स भी मँगाकर रखा है। लेकिन अब तक कुछ हो नहीं पाया है। मैंने अपने फूल के गमले अपने पास से निकाल दिए हैं। सादे क्रोटन को ही रहने दिया है। सबको काका का सप्रेम शुभाशीष (‘काका कालेलकर ग्रंथावली’ से) |
- संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

- उत्तर लिखिए: (2)
काका कालेलकर जी द्वारा सरोज को दिया हुआ संदेश-- ............
- ............
- गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- कृदंत शब्द
- ............
- ............
- प्रत्यययुक्त शब्दों के मूल शब्द: (1)
प्रत्यययुक्त शब्द मूल शब्द कमजोरी ............ साप्ताहिक ............
- कृदंत शब्द
- ‘अपने भावों, विचारों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम पत्र’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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उत्तर

- काका कालेलकर जी द्वारा सरोज को दिया हुआ संदेश-
- हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उर्दू सीखना।
- अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना
-
- कृदंत शब्द:
- लिखा
- भेजा
- प्रत्यययुक्त शब्दों के मूल शब्द:
प्रत्यययुक्त शब्द मूल शब्द कमजोरी कमजोर साप्ताहिक सप्ताह
- कृदंत शब्द:
- पत्र हमारे अंतर्मन की भावनाओं को दूसरों तक पहुँचाने का सबसे सरल और प्रभावशाली साधन है। पत्र लिखते समय हम अपने विचारों को विस्तार से और स्पष्टता के साथ व्यक्त कर पाते हैं। ईमेल या मैसेज के दौर में भी, पत्रों में जो आत्मीयता और अपनापन महसूस होता है, वह अन्य किसी माध्यम में नहीं मिलता। ये हमारे रिश्तों को जोड़ने और यादों को संजोने का काम करते हैं।
