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प्रश्न
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर वृंद के दोहे इस कविता का रसास्वादन कीजिए: [6]
- रचनाकार का नाम - [1]
- पसंद की पंक्तियाँ - [1]
- पसंद आने के कारण - [2]
- कविता का केंद्रीय भाव - [2]
दीर्घउत्तर
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उत्तर
- कवि अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम)
- “उद्यम कहुँ न छोड़िए, पर आशा के मोद।
गागर कैसे फोरिए, अनगिन देखी पोर॥” - ये पंक्तियाँ हमें परिश्रम और आशा का महत्व सिखाती हैं। जीवन में कठिनाइयाँ आने पर भी प्रयास नहीं छोड़ना चाहिए। कवि ने सरल भाषा में गहरा संदेश दिया है, जो प्रेरणादायक है।
- इस कविता का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य को सदैव सद्गुण अपनाने चाहिए, अहंकार से दूर रहना चाहिए और परिश्रम व विनम्रता के साथ जीवन जीना चाहिए। रहीम के दोहे नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों का संदेश देते हैं।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2025-2026 (March) Official Question Paper
