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प्रश्न
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए।
गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में –
C2H5NH2, (C2H5)2NH, (C2H5)3N एवं NH3
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उत्तर
गैस अवस्था में विलायकयोजन प्रभाव नहीं होता। परिणामस्वरूप, क्षारकीयता मुख्य रूप से +I प्रभाव पर निर्भर करती है। +I प्रभाव जितना अधिक होता है, क्षारकीयता उतनी ही अधिक होती है। साथ ही, क्षारीयता उन यौगिकों में अधिक होती है जिनमें अधिक संख्या में ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं, क्योंकि इससे +I प्रभाव बढ़ता है। अतः, दिए गए यौगिकों को गैस अवस्था में उनकी क्षारकीयता के घटते क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया जा सकता है:
(C2H5)3N > (C2H5)2NH > C2H5NH2 > NH3
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित को उनके बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए-
C2H5NH2, C6H5NH2, NH3, C6H5CH2NH2 तथा (C2H5)2NH
निम्नलिखित युगल का यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए।
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निम्नलिखित के कारण बताइए।
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निम्नलिखित के कारण बताइए।
यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है, फिर भी ऐनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनिलीन देती है।
निम्नलिखित के कारण बताइए।
ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
निम्नलिखित पर लघु टिप्पणी लिखिए।
ऐसीटिलन
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए।
क्लोरोबेन्ज़ीन से p-क्लोरोऐनिलीन
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए।
ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन
निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए।
\[\ce{C6H5NH2 + Br2 (aq) ->}\]
