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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
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मानव सभ्यता पर औद्योगिक क्रांति की धमक थमी भी नहीं कि एक नई तकनीकी क्रांति ने अपने आने की घोषणा कर दी है। ‘नैनो-तकनीक’ के समर्थक दावा करते हैं कि जब यह अपने पूरे वजूद से आएगी तो धरती का नामोनिशान मिट जाएगा और नैनो रोबोट की स्वनिर्मित फौज पूरी तरह क्षत-विक्षत शव को पलक झपकते ही चुस्त-दुरुस्त इंसान में तब्दील कर देगी। दूसरी ओर नैनो-तकनीक की असीमित शक्ति से आशंकित इसके विरोधी इसे मिस्र के पिरामिडों में सोई ममियों से भी ज्यादा अभिशप्त समझते हैं। इन दोनों अतिवादी धारणाओं के बीच इतना अवश्य कहा जा सकता है कि हम तकनीकी क्रांति के एक सर्वथा नए मुहाने पर आ पहुँचे हैं जहाँ उद्योग, चिकित्सा, दूर-संचार, परिवहन सहित हमारे जीवन में शामिल तमाम तकनीकी जटिलताएँ अपने पुराने अर्थ खो देंगी। इस अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव के सामाजिक-सांस्कृतिक निहितार्थ क्या होंगे, यह देखना सचमुच दिलचस्प होगा। आदमी ने कभी सभ्यता की बुनियाद पत्थर के बेडौल हथियारों से डाली थी। अनगढ़ शिलाओं को छीलकर उन्हें कुल्हाड़ों और भालों की शक्ल में ढाला और इस उपलब्धि ने उत्पादकता की दृष्टि से उसे दूसरे जंतुओं की तुलना में लाभ की स्थिति में ला खड़ा किया। औज़ारों को बेहतर बनाने का यह सिलसिला आगे कई विस्मयकारी मसलों से गुजरा और औद्योगिक क्रांति ने तो मनुष्य को मानो प्रकृति के नियंत्रक की भूमिका सौंप दी। तकनीकी कौशल की हतप्रभ कर देने वाली इस यात्रा में एक बात ऐसी है, जो पाषाण युग के बेढब हथियारों से चमत्कारी माइक्रोचिप निर्माण तक एक जैसी बनी रही। हम अपने औजार, कच्चे माल को तराशकर बनाते हैं। यह सर्वविदित तथ्य है कि सारे पदार्थ परमाणुओं से मिलकर बने हैं, लेकिन पदार्थों के गुण इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनमें परमाणुओं को किस तरह सजाया गया है। कार्बन के परमाणुओं की एक खास बनावट से कोयला तैयार होता है, तो दूसरी खास बनावट उन्हें हीरे का रूप दे देती है। परमाणु और अणुओं को इकाई मानकर मनचाहा उत्पाद तैयार करना ही ‘नैनो-तकनीक’ का सार है। |
(क) नैनो-तकनीक के समर्थकों ने क्या संभावनाएँ व्यक्त की हैं? [2]
(ख) इसकी असीमित शक्ति से आशंकित विरोधियों का क्या मत है? इस पर टिप्पणी कीजिए। [2]
(ग) ‘नैनो-तकनीक’ से आप क्या समझते हैं? [2]
(घ) मानव प्रकृति का नियंत्रक कैसे बन गया? [2]
(ङ) हीरे और कोयले में अंतर क्यों है? [1]
(च) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक दीजिए। [1]
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उत्तर
(क) नैनो तकनीक के समर्थकों ने कहा है कि जब यह तकनीक पूरे वजूद से काम करने लगेगी तो धरती का पूरा नामोनिशान मिट जाएगा और नैनो रोबोटों की स्वनिर्मित सेना पूरी तरह से क्षत-विक्षत शव को एक झटके में स्वस्थ इंसानों में बदल जाएगी।
(ख) नैनो तकनीक के अनगिनत विरोधियों का कहना है कि यह मिस्र के पिरामिडों में सोई ममियों से भी अधिक अभिशप्त है। यह तकनीकी क्रांति को एक नई दिशा दे सकता है। इससे उद्योग, चिकित्सा, दूरसंचार, परिवहन और हमारे जीवन में शामिल सभी तकनीकी जटिलताओं का मूल्य खो जाएगा।
(ग) नैनो तकनीक ने तकनीकी क्रांति को एक नया मुकाम दिया है। यह तकनीक सिर्फ मनुष्य की सोच की सीमा बढ़ाती है। यह अणुओं और परमाणुओं की इंजीनियरिंग है जो भौतिक, रसायन, बायो इन्फॉर्मेटिक्स और बायो टेक्नोलॉजी को आपस में जोड़ती है।
(घ) मानव ने प्रकृति पर तकनीकी कौशल और उत्पादकता का अधिकार प्राप्त किया, जिससे सभ्यता की बुनियाद बन गई, पत्थर के बेडौल हथियारों और अनगढ़ शिलाओं को छीलकर।
(ङ) हीरा और कोयला दोनों कार्बन से बनाए जाते हैं, लेकिन कार्बन के परमाणुओं की एक विशिष्ट बनावट कोयला बनाती है और दूसरी कोयला बनाती है। हीरा और कोयला केवल उनके अणुओं और परमाणुओं की विशिष्ट बनावट से अलग हैं।
(च) शीर्षक: “नैनो तकनीक और हम” या नैनो तकनीक।
