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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
आपकी दृष्टि में 'मधुर मधुर मेरे दीपक जल' कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है −
(क) शब्दों की आवृति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर।
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उत्तर
इस कविता की सुंदरता इन दोनों में से किसी एक पर निर्भर नहीं है न ही दोनों में से किसी एक की विशेषताओं पर। किसी भी कविता की सुंदरता अनेक कारकों पर निर्भर होता है। इस कविता में इन दोनों विशेषताओं का कुछ-न-कुछ योगदान अवश्य है।
(क) शब्दों की आवृत्ति-कविता में अनेक शब्दों की आवृत्ति हुई है
– मधुर मधुर मेरे दीपक जल।
– युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल
– पुलक-पुलक मेरे दीपक जल।
– सिहर-सिहर मेरे दीपक जल।
इनसे प्रभु-भक्ति का भाव तीव्र हुआ है। उसमें और अधिक प्रसन्नता, उत्साह और उमंग से निरंतर जलते रहने का भाव प्रकट हुआ है।
(ख) सफल बिंब अंकन-इस कविता में बिंबों को सफल अंकन हुआ है, जैसे
सौरभ फैला विपुल धूप बन,
मृदुल मोम-सा धुल रे मृदु तन।
इसमें कवयित्री की भावनात्मक कोमलता प्रकट हुई है। दोनों विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि दोनों ही कारण कविता को सुंदर व प्रभावी बनाने में सक्षम हैं। शब्दों की आवृत्ति से कविता में संगीतात्मकता आ गई है। और बिंबों का अंकन भावबोध में सहायक सिद्ध हुआ है।
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निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन!
इस कविता को कंठस्थ करें तथा कक्षा में संगीतमय प्रस्तुति करें।
कवयित्री अपने प्रियतम का पथ किस प्रकार आलोकित करना चाहती है?
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‘मधुर-मधुर मेरे दीपक जल।’ कविता के आधार पर कवयित्री की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्यययुक्त शब्दों काे ढूँढ़कर लिखिए।
| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
एक शब्द में उत्तर दीजिए:
लघुता का बंधन - ______
