Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बूझता और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुत जाता है।
Advertisements
उत्तर
कुछ लोग धर्म में विशेष आस्था रखते हैं। धर्म के बारे में कुछ नहीं जानते परन्तु अंधविश्वास रखते हैं जिससे उसके खिलाफ़ कुछ भी होता है तो वह क्रोधित हो जाते हैं और इसका फायदा चालाक लोग, स्वार्थी लोग उठा लेते हैं। उनसे अपना स्वार्थ सिद्ध कराते हैं और वे भी उसमें बिना विचारे जुट जाते हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया?
सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?
कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।
लेखक की माँ किस बात के लिए चिंतित थीं? उनकी यह चिंता कैसे दूर हुई?
लेखक ने अपने पिता से किया हुआ वायदा किस तरह निभाया? इससे आपको क्या सीख मिलती है?
हामिद खाँ की दुकान का चित्रण कीजिए।
खरबूजे बेचने वाली महिला पर लोग टिप्पणी क्यों कर रहे थे?
बुढ़िया को रोते देखकर लेखक चाहकर भी क्या न कर सका?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
लेखिका को देखकर 'की' हक्का-बक्का क्यों रह गया?
लेखक ने महादेव के स्वभाव की तुलना किससे की है और क्यों?
अंगदोरजी क्या सुनकर आनंदित हुए? उन्होंने लेखिका को क्या बताया?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
पाठ में आए निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए −
अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए −
विद्यार्थी अपने घर आए अतिथियों के सत्कार का अनुभव कक्षा में सुनाएँ।
लेखक के अनुसार अतिथि का देवत्व कब समाप्त हो जाता है?
उपयुक्त शब्द का चयन करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए −
रामन् की खोज ______ के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी।
न्यूटन के आविष्कार के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
रामन् की खोज भौतिकी के क्षेत्र में क्रांति के समान क्यों मानी जाती है?
रामन् की सफलता में उनके पिता के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।
