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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-नत शिर होकर सुख के दिन मेंतव मुख पहचानँ छिन-छिन में।

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प्रश्न

निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
नत शिर होकर सुख के दिन में
तव मुख पहचानँ छिन-छिन में।

टीपा लिहा
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उत्तर

इन पंक्तियों का भाव है कि कवि सुख के समय, सुख के दिनों में भी परमात्मा को हर पल श्रद्धा भाव से याद करना चाहता है तथा हर पल उसके स्वरूप को पहचानना चाहता है। अर्थात् कवि दुख-सुख दोनों में ही सम भावे से प्रभु को याद करते रहना चाहता है तथा उसके स्वरूप की कृपा को पाना चाहता है।

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आत्मत्राण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.9: आत्मत्राण - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ ४९]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
पाठ 1.9 आत्मत्राण
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 1 | पृष्ठ ४९

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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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‘दुख’ के संबंध में हमारी प्रार्थना और कवि की प्रार्थना में क्या अंतर है?


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'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।


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