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निम्न विषय पर निबन्ध लिखिए जो 300-350 शब्दों से कम न हो: आपने हाल ही में मुसीबत में फँँसे एक पीड़ित परिवार की सहायता की। आपने किसे प्रकार उनकी सहायता की? - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

निम्न विषय पर निबन्ध लिखिए जो 300-350 शब्दों से कम न हो:

आपने हाल ही में मुसीबत में फँँसे एक पीड़ित परिवार की सहायता की। आपने किसे प्रकार उनकी सहायता की? उनकी सहायता करने में आपने किन-किन कठिनाइयों का सामना किया तथा परिवार के पीड़ा मुक्त होने के बाद परिवार की एवं अन्य लोगों की क्या प्रतिक्रियाएँ थीं? वर्णन कीजिए।

लेखन कौशल्य
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उत्तर

जीवन वास्तव में संघर्षों और परेशानियों से भरा हुआ होता है। जीवन पथ पर आगे बढ़ते हुए मनुष्य अनेक कठिनाइयों और समस्याओं से घिर जाता है। ऐसे समय में यदि कोई सहारा बनकर सामने आ जाए और सहायता का हाथ बढ़ा दे, तो वह व्यक्ति देवदूत के समान प्रतीत होता है। ऐसी ही एक घटना मेरे जीवन में घटी, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती।

एक बार मैं रेलयात्रा के माध्यम से दिल्ली से कोलकाता जा रही थी। मैं समय से पहले अपनी सीट पर बैठ चुकी थी और यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार थी। ट्रेन के चलने का समय निकट था और सीटी बज रही थी। यात्रा के दौरान पढ़ने की मेरी पुरानी आदत है, इसलिए मैंने अपने बैग से किताब निकालकर पढ़ना शुरू कर दिया। तभी मैंने देखा कि मेरे सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपनी पत्नी और छोटे बच्चों के साथ आकर बैठ गया। कुछ देर बाद एक अन्य यात्री वहाँ आया और उस सीट पर अपना अधिकार जताने लगा। धीरे-धीरे दोनों के बीच बहस बढ़ने लगी।

स्थिति बिगड़ती देख मैंने ट्रेन के टी.टी. को बुलाया। टी.टी. ने दोनों पक्षों के टिकटों की जाँच की। जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि पहले व्यक्ति का टिकट उसी ट्रेन और उसी कोच का था, जबकि दूसरा यात्री जल्दबाजी में गलत ट्रेन में बैठ गया था। उस व्यक्ति को यह समझ आ गया कि उसकी गलती से यह समस्या उत्पन्न हुई है। उसे न केवल वहाँ से उठना पड़ा, बल्कि उस पर जुर्माना भी लगाया गया।

मैंने टी.टी. से अनुरोध किया कि यदि कहीं कोई खाली सीट उपलब्ध हो, तो उस परिवार को दे दी जाए क्योंकि छोटे बच्चों के साथ खड़े रहना कठिन था। सौभाग्यवश ट्रेन उसी मार्ग पर जा रही थी जहाँ उस परिवार को उतरना था। टी.टी. ने व्यवस्था करते हुए उन्हें मेरी एक सीट दे दी। मैंने स्वयं एक कोने में बैठकर यात्रा पूरी की। इस प्रकार उस परिवार को बैठकर यात्रा करने का अवसर मिल गया।

बच्चों को किसी प्रकार की विशेष परेशानी नहीं हुई क्योंकि वे अपनी माँ की गोद में सुरक्षित थे। अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचकर उस व्यक्ति ने मेरा और अन्य यात्रियों का हृदय से धन्यवाद किया। इस घटना से उन्हें और उनके परिवार को यह महत्वपूर्ण सीख मिली कि यात्रा से पूर्व ट्रेन और टिकट की पूरी जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

यह घटना मेरे लिए मानवता, सहयोग और संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण बन गई।

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