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प्रश्न
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. कहती है मुझसे यह चेटी | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 2. तू है ही मानधन मेरे | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 3. झलमल कर हिम – विंदु झिले थे | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | न्याय में दया सम्मिलित होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
| 5. हुआ विवाद सदय – निर्दय में | हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसकी। | तूने कहानी को समझ लिया है। |
| 7. तूने सुनी कहानी | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| 8. उभय आग्रह थे स्वविषय में | तेज धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 9. तब उसने, जो था स्वाभिमानी – हठ करने की ठानी। | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे न्याय दया का दानी। | तब उस तीर चलाने वाले ने हट करने का निश्चय कर लिया। |
जोड्या लावा/जोड्या जुळवा
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उत्तर
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. कहती है मुझसे यह चेटी | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| 2. तू है ही मानधन मेरे | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 3. झलमल कर हिम – विंदु झिले थे | हिम-कण/ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | तेज धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 5. हुआ विवाद सदय – निर्दय में | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसकी। | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 7. तूने सुनी कहानी | तूने कहानी को समझ लिया है। |
| 8. उभय आग्रह थे स्वविषय में | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 9. तब उसने, जो था स्वाभिमानी – हठ करने की ठानी। | तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे न्याय दया का दानी। | न्याय में दया सम्मिलित होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
