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प्रश्न
नीचे दी गई पंक्ति का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए-
“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”
स्पष्ट करा
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उत्तर
अर्थ: इस पंक्ति में संत रैदास बताते हैं कि हे प्रभु! आप बादल के समान हैं और मैं मोर के समान हूँ। जैसे मोर बादलों को देखकर खुशी से नृत्य करने लगता है, वैसे ही मैं आपको देखकर आनंदित हो उठता हूँ। आगे वे कहते हैं कि जिस प्रकार चकोर पक्षी चंद्रमा को प्रेमपूर्वक निहारता रहता है, उसी तरह मेरा मन भी सदैव आपकी ओर ही केंद्रित रहता है।
भाव: इस पंक्ति में भक्त और भगवान के बीच गहरे प्रेम, आकर्षण और अटूट संबंध का वर्णन किया गया है। भक्त अपने आराध्य के दर्शन से अत्यंत प्रसन्न होता है और उसका मन निरंतर भगवान में ही लीन रहता है। यहाँ अनन्य भक्ति, प्रेम और पूर्ण समर्पण की भावना प्रकट होती है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
