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‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को

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प्रश्न

‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।

शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?

निबंध लेखन की प्रक्रिया को आरेख के रूप में दिखाया गया है। केंद्र में 'विषय' है और उसके चारों ओर प्रेरणा, विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा निर्माण, शैली निर्धारण तथा लेखन और समापन जैसे चरण दिए गए हैं।

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

आरेख के अनुसार निबंध लेखन के चरण इस प्रकार हैं। पहले लेखक के मन में प्रेरणा जागती है। फिर वह विषय चुनता है। इसके बाद वह विचार और जानकारी इकट्ठी करता है, जिसे सामग्री संग्रह कहते हैं। फिर वह रूपरेखा बनाता है, यानी निबंध का ढाँचा तय करता है। उसके बाद वह भाषा और शैली तय करता है। अंत में वह निबंध लिखता है और उसका सुंदर समापन करता है।

मेरे विचार से एक और ढंग बेहतर है। इसमें केंद्र में विषय नहीं, बल्कि मन के भाव होते हैं। लेखक पहले अपना कोई अनुभव या भावना याद करता है। फिर उसी को सरल भाषा में लिख देता है। इसे आरेख में ऐसे दिखा सकते हैं: केंद्र में 'मन के भाव' लिखें और उसके चारों ओर अनुभव, भावना, सरल भाषा तथा ईमानदार अभिव्यक्ति लिखें। यह ढंग मुझे इसलिए बेहतर लगता है क्योंकि इससे लेखन सच्चा और आत्मीय बनता है। लेखक को विषय की चिंता कम होती है और वह अपने अनुभव से सीधे जुड़ता है। निबंधकार मानटेन की पद्धति भी यही थी।

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पाठ 2: क्या लिखूँ? - अभ्यास [पृष्ठ ३६]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga Class 9
पाठ 2 क्या लिखूँ?
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ३६
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