मराठी

मीनू सीधे अपनी माँ के कमरे में चली गई। माँ उसका इंतजार करके अभी-अभी बिस्तर पर लेटी थी। मीनू भी माँ के पास पड़े पलंग पर जाकर लेट गई। मीनू और माँ बहुत देर तक पड़े-पढ़े बातें करती रहीं। - Hindi

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प्रश्न

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:-

     मीनू सीधे अपनी माँ के कमरे में चली गई। माँ उसका इंतजार करके अभी-अभी बिस्तर पर लेटी थी। मीनू भी माँ के पास पड़े पलंग पर जाकर लेट गई। मीनू और माँ बहुत देर तक पड़े-पढ़े बातें करती रहीं। ना जाने मीनू को कब नींद आ गई। फिर सुबह ६:०० बजे ही उसकी आँख खुली।
  1. मीनू कहाँ से आई थी? उसे छोड़ने कौन आया था? [2]
  2. मीनू के लेट होने का क्या कारण था? उसके मन की स्थिति का वर्णन कीजिए। [2]
  3. सुबह उठते ही माँ के हाथ की चाय मिलते ही मीनू को कैसी अनुभूति हुई और क्यों? [3]
  4. नीलिमा के घर जाते समय मीनू ने किस रंग का सूट पहना? सूट पहने देखकर माँ ने क्या कहा? उनकी बात का मीनू ने क्या जवाब दिया? [3]
आकलन
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उत्तर

  1. मीनू अपनी सहेली नीलिमा के घर से (उसके जन्मदिन की पार्टी से) आई थी। उसे घर छोड़ने अमित आया था।
  2. मीनू के देर से आने का कारण नीलिमा के घर पर आयोजित जन्मदिन की पार्टी थी, जो काफी देर तक चली। उसके बाद अमित उसे स्कूटर पर घर छोड़ने आया, जिससे उसे घर पहुँचने में रात हो गई। मीनू का मन असमंजस और सोच-विचार से भरा हुआ था। अमित के साथ बिताए गए समय और उसकी बातों ने मीनू को सोचने पर मजबूर कर दिया था। वह अमित की ओर आकर्षित तो थी, लेकिन अतीत के कड़वे अनुभवों के कारण उसके मन में एक अनजाना डर और हिचकिचाहट भी थी।
  3. सुबह उठते ही माँ के हाथ की चाय पाकर मीनू को बहुत सुखद, शांतिपूर्ण और ममतामयी अनुभूति हुई। उसे एक गहरी मानसिक संतुष्टि का अनुभव हुआ। क्योंकि मीनू रात भर अमित और अपने भविष्य के बारे में सोचकर मानसिक रूप से थकी हुई थी। माँ का यह छोटा सा स्नेहपूर्ण कार्य उसे यह अहसास करा रहा था कि बाहरी दुनिया चाहे उसे किसी भी रूप में देखे, लेकिन उसके घर में उसे बिना किसी शर्त के प्यार और सम्मान मिलता है।
  4. नीलिमा के घर जाते समय मीनू ने नीला (फिरोजी/आसमानी) रंग का रेशमी सूट पहना था। मीनू को तैयार देखकर माँ ने प्रेमपूर्वक कहा था, “आज तो तू इस रंग के सूट में बहुत अच्छी लग रही है।” माँ की बात सुनकर मीनू ने बड़ी सादगी और थोड़े दुख के साथ जवाब दिया था, “माँ, सांवले रंग पर कोई भी रंग अच्छा नहीं लगता, सब एक जैसे ही लगते हैं।” (यह मीनू के मन में अपने रंग को लेकर बैठी हीन भावना को दर्शाता था।)
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