मराठी

महात्मा गाँधी को ऐसा क्यों लगता था कि हिंदुस्तानी राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

महात्मा गाँधी को ऐसा क्यों लगता था कि हिंदुस्तानी राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए?

थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

महात्मा गाँधी को ऐसा इसलिए लगता था, क्योंकि उनका मानना था कि हिंदुस्तानी भाषा में हिंदी के साथ-साथ उर्दू भी शामिल है और ये दो भाषाएँ मिलकर हिंदुस्तानी भाषा बनी है तथा यह हिंदू और मुसलमान दोनों के द्वारा प्रयोग में लाई जाती है। दोनों को बोलने वालों की संख्या अन्य सभी भाषाओं की तुलना में बहुत अधिक है। यह हिंदू और मुसलमानों के साथ-साथ उत्तर और दक्षिण में भी खूब प्रयोग में लाई जाती है। गाँधी जी यह जानते थे कि हिंदी में संस्कृत और उर्दू में संस्कृत के साथ-साथ अरबी और फ़ारसी के शब्द मध्यकाल से प्रयोग हो रहे हैं।

राष्ट्रीय आंदोलन (1930) के दौरान कांग्रेस ने भी यह मान लिया था कि भारत की राष्ट्रभाषा हिंदुस्तानी ही बन सकती है। गाँधी जी साम्प्रदायिकता के खिलाफ थे। वह हिंदुस्तानी भाषा को देश में हिंदू और मुसलमानों में सद्भावना और प्रेम बढ़ाने वाली भाषा मानते थे। वह मानते थे-“इससे दोनों सम्प्रदायों के लोगों में परस्पर मेल-मिलाप, प्रेम, सद्भावना, ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ेगा और यही भाषा देश की एकता को मजबूत करने में अधिक आसानी से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा
सकती है।”

shaalaa.com
राष्ट्र की भाषा
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 15: संविधान का निर्माण - अभ्यास [पृष्ठ ४३०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Itihas Bhag 1, 2 aur 3 [Hindi] Class 12
पाठ 15 संविधान का निर्माण
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ४३०
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×