मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘मैं चिड़िया बोल रही हूँ’ विषय पर स्‍वयंस्‍फूर्त लेखन कीजिए ।

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प्रश्न

‘मैं चिड़िया बोल रही हूँ’ विषय पर स्‍वयंस्‍फूर्त लेखन कीजिए ।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

मैं चिड़िया बोल रही हूँ

मैं चिड़िया बोल रही हूँ
सदा फुदकती, कभी न थकती,
गाती मीठी-मीठी बानी।
ताजा दाना, निर्मल पानी,
शुद्ध हवा और धूप सुहानी।

आपने मेरे बारे में बहुत कुछ सुना होगा। क्या आप मुझे पहचान पाए? मैं वही सुंदर पंखों वाली प्यारी चिड़िया रानी हूँ। मेरा और मनुष्य का रिश्ता सदियों पुराना है। मैं मनुष्य की सहायक हूँ। खेतों में और पेड़ों की हरी पत्तियों पर बसने वाले कीटों को खाकर मैं किसानों की फसलों की रक्षा करती हूँ। मेरा जन्म हुआ तो मैंने खुद को प्रकृति की गोद में पाया। हमारा घोंसला आम के पेड़ पर था और मेरा एक छोटा भाई भी था। आप सोचते होंगे कि हमारा जीवन बहुत आसान है, बस एक डाल से दूसरी डाल पर फुदकना, पर यह सच नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से मेरा अस्तित्व खतरे में है। मनुष्य हमारी उपयोगिता को समझ नहीं पा रहा है। पहले घर खुले-खुले होते थे। हमारा जीवन भी कठिनाइयों से भरा होता है। हमारी माँ दाने की तलाश में ना जाने कहाँ तक उड़ जाती थी? हम दोनों उसके आने की राह देखते थे। थोड़ा बड़े होने पर हमने भी उड़ना सीख लिया। हम आराम से उन घरों में आ-जा सकते थे। हम घरों के आलों में, तस्वीरों के पीछे अपना घोंसला बनाकर आराम से अपने बच्चों को पालती थीं। एक दिन नई जगह की तलाश में मैं इतनी दूर चली गई कि अपनों से बिछड़ गई। अब मेरे सामने एक नई दुनिया थी। जहाँ मुझे अपने हिस्से का संघर्ष स्वयं करना था। एक दिन दानों के लालच में आकर मैं बहेलिए के जाल में फंस गई। उस बहेलिए ने मुझे एक धनी सेठ को बेच दिया। उस धनी सेठ के घर में मुझे बहुत प्यार मिला। लेकिन आजकल के छोटे घर ज्यादातर बंद ही रहते हैं। जब खुलते हैं, तो सिर्फ बाहर आने-जाने के लिए। आज मेरे पास पिंजरा ही सही पर एक छत तो है। मेरे अपने नहीं हैं, पर अपनों जैसा खयाल रखने वाले लोग तो हैं। मुझे समझ नहीं आता कि मनुष्य दूसरों को कैद करके अपना सुख क्यों ढूँढता है?

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उम्मीद
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पाठ 2.5: उम्मीद - स्वाध्याय [पृष्ठ ४१]

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बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.5 उम्मीद
स्वाध्याय | Q १ | पृष्ठ ४१

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