मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

माध्यमभाषया ससन्दर्भं स्पष्टीकुरुत। विद्वन् षण्मुख का गतिर्मम चिरं मूर्ध्न स्थितायां वद।

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प्रश्न

माध्यमभाषया ससन्दर्भं स्पष्टीकुरुत। 

विद्वन् षण्मुख का गतिर्मम चिरं मूर्ध्न स्थितायां वद।

दीर्घउत्तर
सविस्तर उत्तर
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उत्तर १

English:

  • Context: This verse is a clever and humorous riddle-like subhashita reflecting domestic banter between Lord Shiva (addressed as Tat or Vidvan/Shanmukha) and Goddess Parvati, revolving around the presence of River Ganga on Shiva’s head.
  • Explanation: Lord Shiva tells Parvati, “O learned one/O Shanmukha (six-faced), tell me what my fate or recourse will be if Ganga, who has been resting on my head for a long time, is let go (discarded)?” Here, double meanings create the wit: Shanmukha can mean Lord Kartikeya (whose mother is Parvati) or literally “one with six faces” (Shiva, who turned his faces in all directions to watch Ganga descend), and the dialogue cleverly plays on domestic jealousy and divine interplay.
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उत्तर २

हिन्दी:

  • सन्दर्भ: यह श्लोक भगवान शिव और माता पार्वती के बीच के घरेलू हास्य-विनोद पर आधारित एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित है, जो गंगा जी के शिवजी की जटाओं में निवास करने के प्रसंग से जुड़ा है।
  • स्पष्टीकरण: इस पंक्ति में भगवान शिव (या श्लेष के माध्यम से स्कंद/षण्मुख को संबोधित करते हुए) कहते हैं - “हे विद्वान् षण्मुख! तुम ही बताओ कि जो गंगा लंबे समय से मेरे मस्तक पर विराजमान है, यदि उसे छोड़ दिया जाए, तो मेरी क्या गति (दशा) होगी?” पार्वती जी के क्रोध करने पर कि सिर पर गंगा को क्यों धारण किया है, शिवजी यह चतुराई भरा व्यंग्य करते हैं, क्योंकि गंगा के प्रति पार्वती की सौतिया डाह और शिवजी की दुविधा का इसमें बड़ा ही रोचक वर्णन है।
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उत्तर ३

मराठी:

  • संदर्भ: हा श्लोक भगवान शिव आणि माता पार्वती यांच्यातील उपहासात्मक व कौटुंबिक संवादावर (सौतिया मत्सर आणि कोपावर) आधारित एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित आहे.
  • स्पष्टीकरण: या ओळीत भगवान शिव म्हणतात - “हे विद्वान षण्मुख, तूच सांग की जी गंगा बऱ्याच काळापासून माझ्या मस्तकावर स्थिरावली आहे, तिला जर सोडून दिले तर माझी काय गत होईल?” पार्वतीच्या रोषाला उत्तर देताना शिवजींनी येथे मार्मिक कोटी केली आहे; जिथे “षण्मुख” या शब्दाचे द्वयर्थी प्रयोग करत (कार्तिकेय किंवा सहा तोंडांचे शिव) संवादाची रंगत वाढवली आहे.
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  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 5: मोदं वितनोतु संवाद:। - भाषाभ्यासः [पृष्ठ २१]

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बालभारती Sanskrit Aahlaad Standard 12 Maharashtra State Board
पाठ 5 मोदं वितनोतु संवाद:।
भाषाभ्यासः | Q १. ४) | पृष्ठ २१
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