Advertisements
Advertisements
प्रश्न
लक्षण प्ररूपी (फीनोटाइपिक) अनुकूलन की परिभाषा दीजिए। एक उदाहरण भी दीजिए।
Advertisements
उत्तर
लक्षण प्ररूपी अनुकूलन जीवों का ऐसा विशेष गुण है जो संरचना और कार्यिकी की विशेषताओं के द्वारा उन्हें वातावरण विशेष में रहने की क्षमता प्रदान करता है। मरुस्थल के छोटे जीव, जैसे-चूहा, सॉप, केकड़ा दिन के समय बालू में बनाई गई सुरंग में रहते हैं तथा रात को जब तापक्रम कम हो जाता है तब ये भोजन की खोज में बिल से बाहर निकलते हैं। मरुस्थलीय अनुकूलन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण ऊँट है। इसके खुर की निचली सतह,चौड़ी और गद्देदार होती है। इसके पीठ पर संचित भोजन के रूप में वसा एकत्रित रहती है जिसे हंप कहते हैं। भोजन नहीं मिलने पर इस वसा का उपयोग ऊँट ऊर्जा के लिए करता है। जल उपलब्ध होने पर यह एक बार में लगभग 50 लीटर जल पी लेता है जो शरीर के विभिन्न भागों में शीघ्र वितरित हो जाता है। उत्सर्जन द्वारा इसके शरीर से बहुत कम मात्रा में जल बाहर निकलता है। यह प्रायः सूखे मल का त्याग करता है।
संबंधित प्रश्न
अगर समुद्री मछली को अलवणजल (फ्रेशवाटर) की जलजीवशाला (एक्वेरियम) में रखा जाता है तो क्या वह मछली जीवित रह पाएगी? क्यों और क्यों नहीं?
निम्नलिखित के बीच अन्तर कीजिए
बाह्योष्मी और आन्तरोष्मी (एक्टोथर्मिक एवं एंडोथर्मिक)
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
मरुस्थलीय पादपों और प्राणियों का अनुकूलन
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
जल की कमी के प्रति पादपों का अनुकूलन
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
प्राणियों में व्यावहारिक अनुकूलन
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
तापमान और जल की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन।
अजैवीय (abiotic) पर्यावरणीय कारकों की सूची बनाइए।
निम्नलिखित का उदाहरण दीजिए –
आतपोभिद् (हेलियोफाइट)
निम्नलिखित का उदाहरण दीजिए –
सजीवप्रजक (विविपेरस) अंकुरण वाले पादप
निम्नलिखित का उदाहरण दीजिए –
बाह्योष्मी (एक्टोथर्मिक) प्राणी
