मराठी

लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।। का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरे।। छुअत टूट रघुपति न दोसू। मुनि बिन काज करिअत रोसू।। बोले चितै परसु की ओरा। - Hindi Course - A

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।
का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें।।
छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू।।
बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।
बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

(i) परशुराम ने अपना परिचय क्या कहकर दिया?

  1. मैं क्षत्रिय कुल का प्रसिद्ध संरक्षक हूँ।
  2. मैं अत्यंत उग्र स्वभाव का हूँ।
  3. मैं सहसबाहु का संरक्षक हूँ।
  4. मैं ब्राह्मण कुल का संहारक हूँ।

(ii) पद्यांश में ‘जड़’ का अर्थ है:

  1. मूल
  2. स्रोत
  3. नींव
  4. मूर्ख

(iii) लक्ष्मण की वाणी कैसी थी?

  1. व्यंग्यपूर्ण - भयपूर्ण
  2. गंभीर - भयपूर्ण
  3. व्यंग्यपूर्ण - भयरहित
  4. भयपूर्ण - हास्यपूरित

(iv) पद्यांश में बाल ब्रह्मचारी किसे कहा गया है?

  1. परशुराम को
  2. लक्ष्मण को
  3. रघुपति को
  4. महिदेव को

(v) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनकर लिखिए:

कथन: लक्ष्मण का परशुराम के प्रति व्यवहार कोमलता से भरा और विनम्र था।

कारण: लक्ष्मण परशुराम के विचार, आचार और व्यक्तित्व से अत्यंत प्रभावित थे।

  1. कथन गलत है किंतु कारण सही है।
  2. कथन और कारण दोनों गलत हैं।
  3. कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
  4. कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
आकलन
Advertisements

उत्तर

(i) मैं अत्यंत उग्र स्वभाव का हूँ।

(ii) मूर्ख

(iii) व्यंग्यपूर्ण - भयरहित

(iv) परशुराम को

(v) कथन और कारण दोनों गलत हैं।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2024-2025 (March) Delhi Set 2
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×