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प्रश्न
लगभग 80-100 शब्दों में उत्तर लिखिए-
प्रकृति के साथ मानव के दुर्व्यवहार और उसके परिणामों को ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
मानव अपनी बढ़ती आबादी की लोलुपता की पूर्ति के लिए प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार करता है, जंगली जानवरों का शिकार करता है, पेड़ों की कटाई करके घने जंगलों को नष्ट करता है, और अंततः प्रकृति का संतुलन बिगाड़ देता है। प्रकृति में असंतुलन का बहुत बुरा असर हुआ। इससे मौसम चक्र अस्तित्व खो गया। अब गर्मी में बहुत अधिक गर्मी होने लगी, बार-बार बरसात होने लगी, जलजले, सैलाब, तूफान आकर हाहाकार मचाने लगे, और हर दिन नई बीमारियाँ फैलने लगीं। समुद्र तट पर लोगों ने अपने घर बनाए हैं। पशु-पक्षी मारे जा रहे हैं क्योंकि आसपास के जंगल काट लिए गए हैं। मानव बस्ती के बीच भी कभी-कभी समुद्र अँगड़ाई लेता है। कुल मिलाकर, मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के क्रम में हर चीज को नष्ट कर दिया। इससे पर्यावरण असंतुलन पैदा हो गया है और पूरी प्रकृति का अस्तित्व खतरे में है।
