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प्रश्न
लेखिका ने अंगदोरजी के प्रति किस तरह धन्यवाद ज्ञापित किया? इस पर उनकी प्रतिक्रिया क्या थी?
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उत्तर
ऐवरेस्ट के शिखर पर पहुँची भाव विभोर लेखिका ने ईश्वर और अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के बाद उठी और अपने दोनों हाथ जोड़कर अपने रज्जु-नेता अंगदोरजी के प्रति आदर भाव से झुकी। अंगदोरजी जिन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और उसे लक्ष्य तक पहुँचाया। लेखिका ने उन्हें बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट की दूसरी चढाई चढ़ने पर बधाई भी दी। उन्होंने गले से लगाया और उसके कानों में फुसफुसाए, “दीदी, तुमने अच्छी चढ़ाई की। मैं बहुत प्रसन्न हूँ।”
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निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो
- कङ्घा, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
- कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
- अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
- संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
- अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।
ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।
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