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लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?

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प्रश्न

लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?

टीपा लिहा
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उत्तर

लेखक की दृष्टि में दो शब्द सभ्यता और संस्कृति की सही समझ अभी भी नहीं हो पाई है; क्योंकि इनका उपयोग बहुत अधिक होता है और वो भी किसी एक अर्थ में नहीं होता है। इनके साथ अनेक विशेषण लग जाते हैं; जैसे - भौतिक-सभ्यता और आध्यात्मिक-सभ्यता इन विशेषणों के कारण शब्दों का अर्थ बदलता रहता है। इससे यह समझ में नहीं आता कि यह एक ही चीज है अथवा दो? यदि दो है तो दोनों में क्या अंतर है? इसी कारण लेखक इस विषय पर अपनी कोई स्थायी सोच नहीं बना पा रहे हैं।

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संस्कृति
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पाठ 17: भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १३०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 [English] Class 10
पाठ 17 भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति
प्रश्न-अभ्यास | Q 1 | पृष्ठ १३०

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