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कॉपर के धातुकर्म में सिलिका की भूमिका समझाइए। - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

कॉपर के धातुकर्म में सिलिका की भूमिका समझाइए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

भर्जन के दौरान कॉपर पाइराइट FeO तथा Cu2O के मिश्रण में परिवर्तित हो जाता है।

\[\ce{\underset{{कॉपर पाइराइट}}{2CuFeS2} + O2 ->[\Delta] Cu2S + 2FeS + SO2 ^}\]

\[\ce{2Cu2S + 3O2 ->[\Delta] 2Cu2O + 2SO2 ^}\]

\[\ce{2FeS + 3O2 -> 2FeO + 2SO2 ^}\]

FeO (क्षारीय) को हटाने के लिए प्रगलन के दौरान एक अम्लीय गालक सिलिका मिलाया जाता है। FeO, SiO2 से संयोग करके फेरस सिलिकेट (FeSiO3) धातुमल बनाता है जो गलित अवस्था में प्राप्त मैट पर तैरने लगता है।

\[\ce{FeO + \underset{{गालक}}{SiO2} -> \underset{{धातुमल}}{FeSiO3}}\]

अत: कॉपर के निष्कर्षण में सिलिका की भूमिका ऑक्साइड को धातुमल के रूप में हटाने की होती है।

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धातुकर्म का वैद्युतरसायन सिद्धांत
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