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कंपनी के विशेषताओं का वर्णन करें। - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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प्रश्न

कंपनी के विशेषताओं का वर्णन करें।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

कंपनी की विशेषताएँ इस प्रकार हैं -

  1. निगमित संस्था - समय-समय पर लागू होने वाले कानूनों के प्रावधानों के अनुसार एक कंपनी का निर्माण किया जाता है। समान्यतः भारत में कंपनियों का निर्माण तथा पंजीकरण कंपनी अधिनियम के अंतर्गत होता है, बैंकिंग तथा बिमा कंपनियों को छोड़कर, जिनके लिए पृथक कानून है।
  2. पृथक वैधानिक अस्तित्व - एक कंपनी का अलग कानूनी अस्तित्व होता है जो कि इसके सदस्यों से भिन्न होता है। कंपनी किसी भी प्रकार की परिसंपत्ति का क्रय कर सकती है। यह अनुबंध कर सकती है और अपने नाम से बैंक खाता भी खोल सकती है।
  3. सीमित दायित्व - इसके सदस्यों का दायित्व केवल उनके द्वारा खरीदे गए अंशों की अदत्त राशि तक ही सीमित होता है। गारंटी द्वारा सीमित कंपनी की स्थिति में, कंपनी के समापन की दशा में सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा दी गई गारंटी तक ही सीमित रहता है।
  4. स्थायी उत्तराधिकारी - कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति है जो कानून द्वारा निर्मित होने के कारण इसके सदस्यों के परिवर्तित होने पर भी अस्तित्व में रहती है। एक कंपनी को केवल कानून द्वारा विघटित किया जा सकता है। कंपनी के सदस्यों की मृत्यु, दिवालियापन होने की स्थिति में भी कंपनी के अस्तित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता सदस्य आते-जाते रहते हैं।
  5. सार्वमुद्रा - कंपनी कृत्रिम व्यक्ति होने के कारण अपने नाम के हस्ताक्षर नहीं कर सकती। इसलिए प्रत्येक कंपनी को एक सार्वमुद्रा का प्रयोग आवश्यक है जो कि अधिकारित रूप से कंपनी के लिए हस्ताक्षर करती है। कोई दस्तावेज़ यदि इस पर कंपनी की सार्वमुद्रा नहीं है तो कोई कंपनी इसके लिए बाध्य नहीं होगी।
  6. अंशों का हस्तांतरण - एक सार्वजानिक लिमिटेड कंपनी के अंश मुक्त रूप से हस्तांतरणीय होते हैं। अंशों के हस्तांतरण के लिए कंपनी की अनुमति या किसी सदस्य की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होती। लेकिन कंपनी के अंतर्नियमों में अंशों को हस्तांतरित करने के तरीके का उल्लेख होता है।
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कंपनी की विशेषताएँ
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