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प्रश्न
कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि–
बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
- देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।
- क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा …. ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर पड़े रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो!
- जरा आँख लगती तो खाने ही खाने की चीजें दिखाई पड़तीं। गरमागरम खस्ता कचौड़ी…. मावे की बर्फी…. बेसन की चिक्की….। गोलगप्पे और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर! पता नहीं क्यों साबूदाने की खीर सिर्फ उपवास और बीमारी में ही बनाई जाती है। जैसे गुझिया सिर्फ होली-दिवाली और पंजीरी सिर्फ पूर्णिमा के दिन ही बनाई जाती है। क्यों? क्या ये चीजें जब इच्छा हो तब नहीं बनाई जा सकतीं? कोई मना करता है?
- आज क्या खाना बना होगा? खुशबू तो दाल-चावल की आ रही है। अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी। फिर उसमें उन्होंने नीबू निचोड़ा होगा। थोड़ा-सा इस बीमार को भी दे दे कोई।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
