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कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता? (संकेत– उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)

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प्रश्न

कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?

(संकेत– उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

अगर बच्चा सच बोल देता कि वह बीमार नहीं था, बस होमवर्क न करने और सजा के डर से स्कूल नहीं जाना चाहता था, तो पहले नानाजी-नानीजी नाराज होकर उसे डाँटते, क्योंकि झूठ बोलना गलत बात है। फिर वे प्यार से समझाते कि झूठी बीमारी के बहाने बनाने से उसे क्या-क्या नुकसान हुआ दिन भर बिस्तर में पड़े रहना पड़ा, भूखे पेट रहना पड़ा, कड़वी पुड़िया खानी पड़ी और मुन्नू को आम खाते देखकर जलना पड़ा। बच्चे का दिन बदल जाता वह रजाई से निकलकर अपना अधूरा होमवर्क पूरा करता, दाल-चावल खुशी-खुशी खाता और शाम को आँगन में दोस्तों के साथ खेलने जाता। उसकी सोच भी बदल जाती उसे समझ आता कि बीमार दिखना असल में सजा जैसा है, जबकि स्कूल जाने में रिसेस में अमरूद खाने और दोस्तों के साथ खेलने का मजा है। इस अनुभव से उसे एक अच्छी सीख मिलती कि कठिनाई से भागने के लिए झूठ नहीं बोलना चाहिए, बल्कि सच बोलकर और मेहनत करके काम निपटाना चाहिए।

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पाठ 5: नहीं होना बीमार - पाठ से [पृष्ठ ६४]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 5 नहीं होना बीमार
पाठ से | Q (क) | पृष्ठ ६४
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