सूरदास जी के अनुसार, जब उद्धव मथुरा से गोकुल होकर वापस लौटते हैं, तो वे श्रीकृष्ण को वहाँ की स्थिति का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि आपके बिना ब्रजवासियों का समय बहुत कठिनाई से बीत रहा है। गोपियाँ, ग्वाले, गायें और बछड़े सभी उदास हैं और उनके शरीर भी बेहद कमजोर हो गए हैं।
शिशिर और हेमंत ऋतु की ठंडक के कारण जैसे कोमल कमल का पौधा बिना पत्तों के सूना हो जाता है, वैसे ही ब्रजवासियों की दशा भी हो गई है, वे कृष्ण वियोग में अत्यंत पीड़ित और शोकग्रस्त हैं।
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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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कहाँ लौं कहिए व्रज की वात। सुनह स्याम तुम विन उन लोगनि, जैसे दिवस विहात।। गोपी, ग्वाल, गाइ गोसुत सब, मलिन वदन कृस गात। परम दीन जनु सिसिर हेम हत, अंबुजगन विनु पात।। जो कोउ आवत देखि दूरि तें उहि पूछत कुसलात। चलन न देत प्रेम आतुर उर कर चरननि लपटात।। पिक चातक वन वसत न पावत वायस वलि नहिं खात। सूर स्याम संदेसन के डर पथिक न उहिं मग जात।। |
- आकलन:
कृति पूर्ण कीजिए: [2]
- शब्द संपदा:
- निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश से समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए: [1]
- बछड़ा = -----------
- रहगीर = -----------
- निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन कीजिए: [1]
- गोपी − -----------
- ग्वाला − -----------
- निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश से समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए: [1]
- सरल अर्थ/भावार्थ:
प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। [2]
आकलन
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उत्तर

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- बछड़ा = गोसुत
- रहगीर = पथिक
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- गोपी − गोपियाँ
- ग्वाला − ग्वाले
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
