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कविता में यथार्थ स्वीकारने की बात क्यों कही गई है?

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प्रश्न

कविता में यथार्थ स्वीकारने की बात क्यों कही गई है?

एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

‘छाया मत छूना’ कविता में यथार्थ को स्वीकारने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि वर्तमान का यथार्थ ही सत्य होता है। भूतकाल की बातें बनकर रह जाती हैं और भविष्य के बारे में कुछ ज्ञान नहीं होता है। अच्छे भविष्य के बारे में सोचते रहना कल्याण करना है। यथार्थ से ही हमारा जीवन चलता है। ये यथार्थ हमारे साहस और धैर्य की परीक्षा लेते हैं तथा जीवन पथ को सुगम बनाते हैं।

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छाया मत छूना
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

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