Advertisements
Advertisements
प्रश्न
जब दाब प्रवण्ता बल उत्तर से दक्षिण दिशा की तरफा हो अर्थात् उपोष्ण उच्च दाब से विषुवत वृत्त की ओर हो तो उत्तरी गोलार्ध में उष्णकटिबंध में पवनें उत्तरी-पूर्वी क्यों होती हैं?
Advertisements
उत्तर
पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन पवनों की दिशा को प्रभावित करता है। इसे कोरिऑलिस बल कहा जाता है। इसके प्रभाव से पवनें उत्तरी गोलार्ध में अपनी मूल दिशा से दाहिने तरफ व दक्षिणी गोलार्ध में अपने बाईं तरफ विक्षेपित हो जाती हैं। कोरिऑलिस प्रभाव दाब प्रवणता के समकोण पर कार्य करता है। दाब प्रवणता बल समदाब रेखाओं के समकोण पर होता है। दाब प्रवणता जितनी अधिक होगी, पवनों का वेग उतना ही अधिक होगा और पवनों की दिशा उतनी ही अधिक विक्षेपित होगी। इन दो बलों के एक-दूसरे से समकोण पर होने के कारण निम्न दाब क्षेत्रों में पवनें इसी के इर्द-गिर्द बहती हैं, इसलिए जब दाब प्रवणता बले उत्तर से दक्षिण दिशा की तरफ हो अर्थात उपोष्ण उच्चदाब से विषुवत वृत की ओर हो तो उत्तरी गोलार्ध में उष्णकटिबंध में पवनें उत्तर-पूर्व होती हैं।
