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प्रश्न
इस वृत्तांत को पढ़ते-पढ़ते तुम्हें भी अपनी कोई छोटी या लंबी यात्रा याद आ रही हो तो उसके बारे में लिखो।
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उत्तर
एक बार मैं हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर गया था। शाम के समय मैं बस में बैठ गया और सुबह जब आँख खुली तो मैंने हमारी बस को हिमाचल प्रदेश की घुमावदार पहाड़ी रास्तों में पाया। वहाँ का रास्ता खतरनाक था। इन रास्तों में कहीं एक तरफ़ खाई थी, तो दूसरी तरफ़ पहाड़। ये बहुत भयानक लग रहे थे। कई घुमावदार रास्तों से निकलकर हम गाँव की तरफ पहुँचे। इन पहाड़ों पर बस की गति धीमी होती है। हम सुबह अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचे, जहाँ से बर्फ़ीली चोटियाँ सूरज की रोशनी में सोने की तरह चमक रही थी। बहुत ही सुन्दर दृश्य था। इसको देखकर रास्ते की सारी थकावट दूर हो गई।
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संबंधित प्रश्न

(क) लद्दाख जम्मू-कश्मीर राज्य में है। ऊपर दिए भारत के नक्शे में हूँढ़ो कि लद्दाख कहाँ है और तुम्हारा घर कहाँ है?
(ख) अनुमान लगाओ कि तुम जहाँ रहते हो वहाँ से लद्दाख पहुँचने में कितने दिन लग सकते हैं और वहाँ किन-किन ज़रियों से पहुँचा जा सकता है?
(ग) किताब के शुरू में तुमने तिब्बती लोककथा ‘राख की रस्सी’ पढ़ी थी। नक्शे में तिब्बत को ढूँढ़ो।
बर्फ से ढके चट्टानी पहाड़ों के उदास और फीके लगने की क्या वजह हो सकती थी?
बताओ, ये जगहें कब उदास और फीकी लगती हैं और यहाँ कब रौनक होती है?
| घर | बाज़ार | स्कूल | खेत |
'जवाहरलाल को इस कठिन यात्रा के लिए तैयार नहीं होना चाहिए।'
तुम इससे सहमत हो तो भी तर्क दो, नहीं हो तो भी तर्क दो। अपने तर्कों को तुम कक्षा के सामने प्रस्तुत भी कर सकते हो।
‘कोलाज’ उस तस्वीर को कहते हैं जो कई तस्वीरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर एक कागज़ पर चिपका कर बनाई जाती है।
1. तुम मिलकर पहाड़ों का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए पहाड़ों से जुड़ी विभिन्न तस्वीरें इकट्ठा करो- पर्वतारोहण, चट्टान, पहाड़ों के अलग-अलग नज़ारे, चोटी, अलग-अलग किस्म के पहाड़। अब इन्हें एक बड़े से कागज़ पर पहाड़ के आकार में ही चिपकाओ। यदि चाहो तो ये कोलाज तुम अपनी कक्षा की एक दीवार पर भी बना सकते हो।
2. अब इन चित्रों पर आधारित शब्दों का एक कोलाज बनाओ। कोलाज में ऐसे शब्द हों जो इन चित्रों का वर्णन कर पा रहे हों या मन में उठने वाली भावनाओं को बता रहे हों।
अब इन दोनों कोलाजों को कक्षा में प्रदर्शित करो।
जवाहरलाल को अमरनाथ तक का सफर अधूरा क्यों छोड़ना पड़ा?
जवाहरलाल, किशन और कुली सभी रस्सी से क्यों बँधे थे?
पाठ में नेहरू जी ने हिमालय से चुनौती महसूस की। कुछ लोग पर्वतारोहण क्यों करना चाहते हैं?
ऐसे कौन-से चुनौती भरे काम हैं जो तुम करना पसंद करोगे?
- उदास फीके बर्फ से ढके चट्टानी पहाड़
- हिमालय की दुर्गम पर्वतमाला मुँह उठाए चुनौती दे रही थी।
"उदास होना” और “चुनौती देना” मनुष्य के स्वभाव हैं। यहाँ निर्जीव पहाड़ ऐसा कर रहे हैं। ऐसे और भी वाक्य हैं। जैसे- - बिजली चली गई।
- चाँद ने शरमाकर अपना मुँह बादलों के पीछे कर लिया।
इस किताब के दूसरे पाठों में भी ऐसे वाक्य ढूँढो।
