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इस विस्तृत संसार में उनके लिए धैर्य अपना मित्र, बुद्धि अपनी पथप्रदर्शक और आत्मावलंबन ही अपना सहायक था।

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प्रश्न

इस विस्तृत संसार में उनके लिए धैर्य अपना मित्र, बुद्धि अपनी पथप्रदर्शक और आत्मावलंबन ही अपना सहायक था।

एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

वंशीधर को अपने सद्गुणों जैसे धीरज, बुधि और आत्मविश्वास पर ही भरोसा था। वे सत्य की राह पर अपने बूते पर चलने वाले युवक थे।

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नमक का दारोगा
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पाठ 1.01: नमक का दारोगा - अभ्यास [पृष्ठ १७]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh bhag 1 Class 11
पाठ 1.01 नमक का दारोगा
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १७

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वृद्ध मुंशी 


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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।


पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

“पढ़ना-लिखना' को किस अर्थ में प्रयुक्त किया गया होगा:

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