मराठी

इस प्रेक्षण की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे? क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गंध वाली HCI गैस प्राप्त होती है

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

इस प्रेक्षण की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?

क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गंध वाली HCI गैस प्राप्त होती है, परंतु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?

थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

जब सांद्र H2SO4 को क्लोराइडयुक्त एक अकार्बनिक मिश्रण में मिलाया जाता है, तो कम वाष्पशील अम्ल H2SO4 अधिक वाष्पशील अम्ल HCl को विस्थापित करता है और HCl गैस की तीक्ष्ण गंध आती है।

\[\ce{2NaCl(s) + H2SO4(l) -> 2NaHSO4(s) + 2HCl(g)}\]

HCl एक दुर्बल अपचायक है। यह H2SO4 को SO2 में अपचयित करने में असमर्थ है। जब मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित होता है तो अधिक उड़नशील अम्ल HBr विस्थापित होता है। HBr एक अधिक प्रबल अपचायक है और H2SO4 को SO2 में अपचयित कर देता है। यह स्वयं ऑक्सीकृत होकर ब्रोमीन देता है जो लाल वाष्प के रूप में प्राप्त होती है।

\[\ce{2NaBr + H2SO4 -> 2NaHSO4 + 2HBr}\]

\[\ce{2HBr + H2SO4 -> SO2 + 2H2O + \underset{\text{लाल वाष्प}}{Br2(g)}}\]

shaalaa.com
अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-

मरक्यूरी (II) क्लोराइड


निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-

निकल (II) सल्फेट


निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-

क्रोमियम (III) ऑक्साइड


अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?


इस अभिक्रिया को देखिए-

\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + 2O2(g)}\]

बताइए कि इसे निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?

\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + O2(g) + O2(g)}\]

उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।


"जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया संपन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।" इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।


निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?

\[\ce{XeO^{4-}_6(aq) + 2F^-(aq) + 6H^+(aq) -> XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l)}\]

यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग \[\ce{XeO^{4-}_6}\] है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?


आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए-

\[\ce{MnO^-_4(aq) + I^-(aq) -> MnO2(s) + I2(s)}\] (क्षारीय माध्यम)


आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित कीजिए-

\[\ce{H2O2(aq) + Fe^2+(aq) -> Fe^{3+}(aq) + H2O(l)}\] (अम्लीय माध्यम)


आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित कीजिए-

\[\ce{Cr2O^2-_7 + SO2(g) -> Cr^3+(aq) + SO^2-_4(aq)}\] (अम्लीय माध्यम)


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×