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इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए। “पानी आता भी है तो बेवकता” “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात

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प्रश्न

इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।

  • “पानी आता भी है तो बेवकता”
  • “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं”
  • “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है”
  • “अकाल और बाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं”
सविस्तर उत्तर
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उत्तर

पंक्ति 1: “पानी आता भी है तो बेवकता” इसका अर्थ है कि नलों में पानी पक्के समय पर नहीं आता। कभी देर रात को, कभी बहुत सबेरे आता है। लोगों को मीठी नींद छोड़कर उठकर बालटियाँ, बर्तन और घड़े भरने पड़ते हैं। पानी को लेकर मोहल्ले में रोज़ झगड़े होते हैं। कई लोग नल के पाइप में मोटर लगवाकर सबका पानी अपने घर खींच लेते हैं, जिससे दूसरों का हक छिन जाता है और कमी और बढ़ जाती है।

पंक्ति 2: “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं” गर्मी के मौसम में नल, तालाब और नदियाँ सूख जाते हैं। शहरों में पानी बिकने लगता है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में भी लोगों को पानी के लिए भयानक कष्ट झेलने पड़ते हैं। कई जगह पानी की कमी इतनी बढ़ जाती है कि जीवन दूभर हो जाता है।

पंक्ति 3: “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है” यह पंक्ति बाढ़ के दिनों की है। बरसात में घर, स्कूल, सड़कें और रेल की पटरियाँ पानी में डूब जाती हैं। स्कूल-दफ्तर बंद हो जाते हैं, यातायात ठप हो जाता है। कुछ दिनों के लिए जिंदगी रुक-सी जाती है और बहुत कुछ पानी के साथ बह भी जाता है। मुंबई जैसा बड़ा शहर भी बाढ़ से नहीं बच पाता।

पंक्ति 4: “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं” पानी का बहुत कम हो जाना अकाल है और बहुत ज्यादा हो जाना बाढ़। दोनों का एक ही कारण है — जल-चक्र का गलत इस्तेमाल। हमने जमीन के लालच में अपने तालाबों-झीलों को कचरे से पाटकर उन पर मकान, बाजार और स्टेडियम बसा लिए, इसलिए वर्षा का पानी जमा नहीं हो पाता। गर्मी में भूजल भंडार सूख जाता है, यानी अकाल, और बरसात में पानी कहीं थमता नहीं, बहकर बाढ़ बन जाता है। अगर हम तालाबों, झीलों और नदियों की रखवाली करें और वर्षा जल संग्रहण द्वारा वर्षा का जल जमा करें, तो दोनों समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

चर्चा से सीख: ये पंक्तियाँ हमें बताती हैं कि पानी रुपयों से भी कई गुना कीमती है। धरती एक बड़ी गुल्लक की तरह है — यदि हम बरसात का जल इसमें भरते रहें और अपना भूजल भंडार सुरक्षित रखें, तो न अकाल पड़ेगा, न बाढ़ आएगी।

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पाठ 4: पानी रे पानी - पाठ से [पृष्ठ ४६]

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एनसीईआरटी Hindi Malhar Class 7
पाठ 4 पानी रे पानी
पाठ से | Q 1. | पृष्ठ ४६
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