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प्रश्न
इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
कहानी की इन बातों को पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आती है (इन्हें रेखांकित करें):
- क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा... ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो! काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पड़ूँगा! – एक छोटे बच्चे का बीमार होने की इच्छा करना बहुत मज़ेदार लगता है।
- मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है। – झूठा बीमार बनने के लिए एक साथ तीन शिकायतें करना हास्यपूर्ण है।
- आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए। – यह चाल इसलिए मज़ेदार है कि बच्चा जानता था कि घर में थर्मामीटर है ही नहीं, फिर भी उसने यह चाल चली।
- क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। – जिस स्कूल से छुट्टी मारी, उसी के लिए तरसना बहुत मज़ेदार लगता है।
- कैसे चूस रहा है। पूरी गुठली मुँह में ठूँसे। जैसे आम कभी देखे न हों। भुक्कड़ कहीं का। – आम चूसते मुन्नू पर ईर्ष्या और गुस्से से भरी यह कुढ़न बहुत रोचक है।
- अक्लमन्द! और बीमार बनो।
- इसके बाद स्कूल से छुट्टी लेने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया। – कहानी के अंत में बच्चे का यह सीखना भी चेहरे पर मुस्कान ला देता है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
