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गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूहों के संगठनों के पीछे मूल विचार क्या हैं? अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए। - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूहों के संगठनों के पीछे मूल विचार क्या हैं? अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं। जहाँ हैं, वहाँ भी बैंक से कर्ज लेना साहूकार से कर्ज लेने की अपेक्षाज्यादा मुश्किल है। ऋणाधार की कमी होने के कारण भी गरीब परिवार बैंकों से ऋण नहीं ले पाते। इसलिए गरीब लोग महाजनों से ऋण लेते हैं जो ब्याज की दरें ऊँची रखते हैं। गरीबों को इस हालात से बचाने के लिए ऋण देने के नए तरीकों को अपनाने की कोशिश की गई है। आत्मनिर्भर गुटों के संगठन के पीछे भी यही विचार है। इन गुटों को सरकार ऋण देती है। इस ऋण को उतारने की जिम्मेदारी भी गुट की होती है। आत्मनिर्भर गुट कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं। उन्हें समयानुसार विभिन्न लक्ष्यों के लिए एक यथोचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है। इससे गाँव के पुरुष व महिलाएँ स्वावलंबी बन जाते हैं। गुट की नियमित बैठकों के जरिए लोगों को एक माध्यम मिलता है जहाँ वे तरह-तरह के सामाजिक विषयों, जैसे–स्वास्थ्य, पोषण और हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाते हैं।

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निर्धनों के स्वयं सहायता समूह
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 3: मुद्रा और साख - अभ्यास [पृष्ठ ५२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Samajik Vigyaan Aarthik Vikas ki Samajh [Hindi] Class 10
पाठ 3 मुद्रा और साख
अभ्यास | Q 6. | पृष्ठ ५२
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