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प्रश्न
“गौरी एक चरित्र प्रधान कहानी है”। कहानी के आधार पर गौरी की देशभक्ति एवं त्याग का वर्णन करते हुए बताइए कि गौरी का योगदान सीताराम जी की तुलना में कहीं कम नहीं था।
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उत्तर
गौरी एक भावुक कहानी है। गौरी एक शक्तिशाली महिला है। बाबू राधाकृष्णन की इकलौती उननीस वर्षीय सुंदर बेटी गौरी के विवाह की चिंता माता-पिता को हुई। लज्जा और संकोच के कारण गौरी अपने माता-पिता से कह नहीं पाई कि वे उसका विवाह किसी और व्यक्ति से करवा दें। वह हर समय खुश रहेगी।
उसे अपने दो छोटे बच्चों के साथ विदुर सीताराम देखने आते हैं। राधाकृष्णन अपने देशभक्ति के लिए कई बार जेल जा चुके थे, लेकिन वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी उनके दो बच्चों की धाय माँ बने। गौरी सीताराम की सादगी और देशभक्ति को जानकर उन्हें अपना पति मान लेती है। गौरी को देशभक्ति से प्रभावित करना उसके अंदर छिपे हुए देशभक्ति को दिखाता है। सीताराम जी को जेल में डालने पर वह अपने नौकर के साथ कानपुर जाकर बच्चों को देखती है। यह भी हर महीने बच्चों की कुशल-क्षेम के बारे में समाचार देती है। गौरी त्याग का उदाहरण है। सीताराम और उसके दोनों बच्चों की माँ बनने के लिए धनी तहसीलदार साहब से विवाह करती है। गौरी ने जो त्याग किया है, वह किसी मायने में युद्धभूमि में किये गये त्याग से कम नहीं है; वह एक देशभक्त, स्वतंत्रता सेनानी के बच्चों की माँ बनकर सन्हें घरेलू कामों से मुक्त करके स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। सीताराम जी का योगदान गौरी के सराहनीय त्याग, साहस, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से कम नहीं है।
