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प्रश्न
एक पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
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उत्तर
पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तन (Post fertilization development in a flower)-पुष्पीय पौधों में दोहरा निषेचन तथा त्रिक संलयन (double fertilization and triple fusion) होता है। इसके फलस्वरूप भ्रूणकोष (embryo sac) में द्विगुणित युग्मनज (zygote) तथा त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (primary endospermic nucleus) बनता है। इनसे क्रमशः भ्रूण (embryo) तथा भूणपोष (endosperm) बनता है। भ्रूणपोष विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। इसके साथ-साथ बीजाण्ड में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं जिसके फलस्वरूप बीजाण्ड से बीज तथा अण्डाशय से फलावरण (pericap) का निर्माण होता है।
- बीजाण्डवृन्त – बीजवृन्त बनाता है।
- अध्यावरण – बीजावरण बनाता है।
- अण्डद्वार – बीजद्वार बनाता है।
- बीजाण्डकाय (nucellus) – प्रायः नष्ट हो जाता है, कभी-कभी भोजन संचित होने के कारण पेरिस्पर्म (perisperm) बनाता है।
- भ्रूणकोष (embryosac)
- अण्ड कोशिका (egg cell) – भ्रूण (embryo) बनाती है।
- सहायक कोशिकाएँ (synergids) – नष्ट हो जाती हैं।
- प्रतिमुख कोशिकाएँ (antipodal cells) – नष्ट हो जाती हैं।
- ध्रुवीय केन्द्रक (polar nuclei) – भ्रूणपोष बनाता है।
- अण्डाशय की भित्ति – फलभित्ति बनाती है। बीज में भ्रूण सुप्तावस्था में रहता है। बीज चारों ओर से बाह्यकवच तथा अन्त:कवच (testa & tegmen) से बने अध्यावरण से घिरा होता है। भ्रूण बीजपत्रों के मध्य स्थित होता है। फलभित्ति की संरचना के आधार पर फल सरस अथवा शुष्क होते हैं।
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