मराठी

ईंटे बनाने के, बीड़ी रोल करने के, सॉफ्टवेयर इंजीनियर या खदान के काम जो बॉक्स में वर्णित किए गए हैं, के कामगारों के सामाजिक संघटन का वर्णन कीजिए। कार्यावस्थाएँ कैसी हैं और उपलब्ध सुविधाएँ कैसी हैं? - Sociology (समाजशास्त्र)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

ईंटे बनाने के, बीड़ी रोल करने के, सॉफ्टवेयर इंजीनियर या खदान के काम जो बॉक्स में वर्णित किए गए हैं, के कामगारों के सामाजिक संघटन का वर्णन कीजिए। कार्यावस्थाएँ कैसी हैं और उपलब्ध सुविधाएँ कैसी हैं? मधु जैसी लड़कियाँ अपने काम के बारे में क्या सोचती हैं?

थोडक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

  • सामाजिक संस्थाएँ; जैसे-जाति, रिश्तेदारी, संपर्क, लिंग तथा क्षेत्र कार्य के क्षेत्र का निर्धारण करते हैं। ये इस बात का भी निर्धारण करते हैं कि उत्पादन का विपणन किस प्रकार से होता है। कुछ रोजगार के क्षेत्रों तथा विभागों में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में काम करती हैं। उदाहरण के तौर पर शिक्षक तथा नर्स के रूप में महिलाएँ पुरुषों से अधिक संख्या में काम करती हैं, अपेक्षाकृत इंजीनियरिंग अथवा अन्य क्षेत्रों के।
  • भारत में 90% कार्य, चाहे वो कृषि का हो, उद्योग का हो या सेवा का हो-असंगठित अथवा अनौपचारिक क्षेत्र में है।
  • बहुत कम लोग बड़ी फर्मों में काम करते हैं जहाँ कि वे दूसरे क्षेत्रों और पृष्ठभूमि वाले लोगों से मिल पाते हैं।
  • नगरीय क्षेत्र में इस प्रकार के मौके मिल जाते हैं। नगरीय क्षेत्र में आपका पड़ोसी आपसे भिन्न क्षेत्र का हो सकता है। मोटे तौर पर अधिकतर भारतीय लोग छोटे पैमाने पर ही कार्य कर रहे स्थानों पर ही कार्य करना पंसद करते हैं। भारत में लगभग 60% लोग प्राथमिक क्षेत्र (कृषि तथा खान), 17% लोग द्वितीयक क्षेत्र (उत्पादक, निर्माण तथा उपयोगिता) तथा 23% लोग तृतीयक क्षेत्र (व्यापार, यातायात, वित्तीय, सेवाएँ इत्यादि) में कार्यरत थे।
  • कृषि के क्षेत्र में तेजी से गिरावट आई है। इस क्षेत्र में होने वाले कार्य लगभग आधे रह गए हैं। यह स्थिति बहुत ही गंभीर है। इसका अर्थ यह हुआ कि जिस क्षेत्र में ज्यादा लोग कार्यरत हैं, वह उन्हें, अधिक आमदनी देने में सक्षम नहीं है।
  • भारत अभी भी एक बड़ा कृषि प्रधान देश है। सेवा क्षेत्र-दुकानें, बैंक, आई.टी. उद्योग, होटल तथा अन्य क्षेत्रों में ज्यादा लोग कार्यरत हैं। नगरीय मध्यम वर्ग का विकास उनके मूल्यों के साथ हो रहा है। ठीक उसी प्रकार से जिस प्रकार से हम टी.वी. के सीरियलों तथा फिल्मों में देखते हैं।
  • लेकिन हम यह भी देखते हैं कि भारत में बहुत थोड़े से लोग ही सुरक्षित रोजगार प्राप्त करने में सफल हो पाते हैं। इसके साथ ही वेतनभोगी वर्ग का एक छोटा-सा हिस्सा भी अनुबंध श्रम के प्रचलन के कारण असुरक्षित हो गया है।
  • सरकारी रोजगार ही अब तक जनसंख्या के अधिकांश लोगों का कल्याण करने का एकमात्र मार्ग था, लेकिन अब वह भी कम होता जा रहा है। मधु जैसी लड़कियाँ बीड़ी बनाने तथा तेंदु के पत्ते को गोल कर उसमें तंबाकू भरने का पूरा आनंद उठाती है।
  • वे अपने परिवार के साथ बैठकर अन्य महिलाओं के साथ गपशप करती हैं। वे अपना अधिकांश समय बीडी बनाने में लगाती हैं।
  • लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने के कारण मधु की पीठ में दर्द हो जाता है। मधु फिर से विद्यालय जाना चाहती है।
shaalaa.com
कार्यावस्थाएँ
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×