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प्रश्न
दोहरे परिसंचरण का क्या महत्ता है?
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर १
- ऑक्सीजन रहित रक्त शरीर के विभिन्न भागों से महाशिराओं द्वारा दाएँ अलिंद में इकट्ठा किया जाता है। जब दायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह दाएँ निलय में चला जाता है। जब दायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह ऑक्सीजन रहित रक्त फुफ्फुस धमनी के माध्यम से फुस्फुस (फेफड़ों) में चला जाता है, जहाँ पर गैसों का विनिमय होता है।
- यह रक्त ऑक्सिजनित होकर फुफ्फुस शिराओं के द्वारा वापिस ह्दय में बाएँ अलिंद में आ जाता है। जब बायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह ऑक्सिजनित रक्त बाएँ निलय में आता है। जब बायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह रक्त शरीर के विभिन्न भागों में महाधमनी के माध्यम से वितरित किया जाता है।

अत: वही रक्त ह्दय चक्र में ह्दय में से दो बार गुज़रता है, एक बार ऑक्सिजनित तथा दूसरी बार ऑक्सीजन रहित रक्त के रूप में। इसी को दोहरा परिसंचरण कहते हैं।
हमारा ह्दय चार कोष्ठकों से मिलकर बना है इसके ही कारण से हमारे शरीर के सभी भागों को ऑक्सिजनित रक्त वितरित किया जाता है। इसके कारण से ही कोशिकाओं व ऊतकों में ऑक्सीजन का वितरण सही आवश्यकता अनुसार बना रहता है।
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उत्तर २
इसमें दोहरे परिसंचरण और फुफ्फुसीय परिसंचरण शामिल हैं। दोहरे परिसंचरण का परिसंचरण मार्ग निम्नलिखित प्रवाह चार्ट में दिया गया है।

डबल सर्कुलेशन या प्रणालीगत और फुफ्फुसीय परिसंचरण का पृथक्करण, शरीर को उच्च चयापचय दर प्रदान करता है और दोनों परिसंचरणों को उन अंगों की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग रक्तचाप रखने की अनुमति देता है जिन्हें वे आपूर्ति करते हैं।
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द्विसंचरण (डबल सरकुलेशन)
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
