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प्रश्न
भारत में विभिन्न भागों से उठने वाली क्षेत्रीय मांगों से 'विविधता में एकता' के सिद्धांत की अभिव्यक्ति होती है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? तर्क दीजिए।
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उत्तर
क्षेत्रीय मांगों से 'विविधता में एकता' की अभिव्यक्ति - भारत एक बहुलवादी समाज है और कई प्रकार की विविधताओं वाला राष्ट्र हैं। ये विविधताएँ भाषा, धर्म क्षेत्र आदि के आधार पर बनी हुई हैं। इनके कारण क्षेत्रीय आकांक्षायाँ उभरती रहती हैं, सभी क्षेत्रों की मांगे एक समान नहीं होतीं, कई बार वे एक - दूसरे की विरोधी भी होती हैं जैसे की किसी नदी के जल के बँटवारे से संबंधित विवाद, किसी बड़े उघोग को किस राज्य या क्षेत्र में लगाया जाए इस के संबंध में विवाद आदि। कभी अलगाववादी क्षेत्रीय माँग भी उभर आती है। परन्तु इन विविधताओं के होते हुए भी राष्ट्रिय एकता बनी हुई है।
अंतराष्ट्रीय जगत में भारत की अलग पहचान है। भारत की एक अलग संस्कृति है जिसमे अहिंसा, विश्वशांति, विश्वबंधुत्व आदि प्रमुख विशेषताएं हैं। भारत के अंदर बेशक कोई कहे की वह पंजाबी है या बंगाली है, मराठी है या गुजरती है, परन्तु अब जब दो भारतीय अमेरिका या कनाडा, इंग्लैंड या पेरिस में एक - दूसरे के संपर्क में आते हैं तो उनमे यह भावना सबसे पहले प्रकट होती है की हम भारतीय हैं। विदेशों में सभी भारतीय एकजुट होकर भारतीय राष्ट्र का अंग होने और राष्ट्रिय सम्मान तथा हितों की रक्षा के लिए एकता का उदाहरण रखते हैं। भारत - पाक युद्धों के दौरान भारत के सभी दलों, सभी वर्गों, सभी क्षेत्रों के लोगों के लोगों ने राष्ट्रिय एकता का परिचय दिया और उसकी रक्षा के लिए सरकार को पूरा समर्थन दिया। जब 1962 में चीन ने नेफा (अब अरुणाचल प्रदेश) पर आक्रमण किया था तो गुजराती भी यह समझता था की यह आक्रमण उस पर हुआ है, मद्रासी भी यही समझता था, उत्तर प्रदेश में रहने वाला नागरिक भी यही समझता था। अतः क्षेत्रीय मांगों से भारतीय राष्ट्र के विभाजन का अनुमान नहीं होता बल्कि विविधता में एकता का ज्ञान होता हैं।
