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भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर टिप्पणी लिखिए।

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प्रश्न

भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर टिप्पणी लिखिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रकृति में लगातार बदलाव महसूस किए जा रहे हैं जिन्हें निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट किया होता है

  1. भारत का कुल विदेशी व्यापार 1950-51 में 1, 214 करोड़ रुपये से बढ़कर 2004-05 में 8, 37, 133 करोड़ तथा 2006-07 में 13, 84, 368 करोड़ रुपये हो गया।
  2. निर्यात की तुलना में आयात में तेजी से वृद्धि हुई है। 1950-51 में आयात 608.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 2004-05 में 4,81,064.0 करोड़ रुपये तथा 2006-07 में 820,568.0 करोड़ रुपये हो गया। जबकि निर्यात मूल्य 606.0 करोड़ रुपये से बढ़कर 2004-05 में 356,069.0 करोड़ रुपये तथा 2006-07 में 5,63,800.0 करोड़ रुपये हो गया।
  3. भारत के आयात तथा निर्यात के मूल्यों में लगातार अंतर बढ़ता ही जा रहा है जिससे व्यापार संतुलन विपरीत अर्थात् भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रतिकूल है।
  4. विश्व के कुल निर्यात व्यापार में भारत की भागीदारी भी लगातार कम होती जा रही है। 1950 में यह 2.1% थी, अब घटकर मात्र 1% रह गयी है। इसके लिए अनेक कारणों को जिम्मेदार माना जाता है
    (क) विश्व बाजार में रुपये का अवमूल्यन,
    (ख) उत्पादन में धीमी प्रगति,
    (ग) घरेलू उपभोग में वृद्धि,
    (छ) विश्व बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा आदि।
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अंतर्रष्ट्रीय व्यपार का परिचय
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 8: अंतर्रष्ट्रीय व्यपार - अभ्यास [पृष्ठ १३२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Bhugol Bharat Log aur Arthvyavastha [Hindi] Class 12
पाठ 8 अंतर्रष्ट्रीय व्यपार
अभ्यास | Q 3. (ii) | पृष्ठ १३२
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