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प्रश्न
‘अतिथि देवो भव’ उक्ति की व्याख्या करें तथा आधुनिक युग के संदर्भ में इसका आकलन करें।
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उत्तर
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता का दर्जा दिया गया है। उसे देवता के समान मानकर उसका आदर सत्कार किया जाता है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य मशीनी जीवन जी रहा है। उसके पास अपने परिवार के लिए समय नहीं रह गया है तो अतिथि के लिए समय कैसे निकाले। इसके अलावा महँगाई के इस युग में जब अपनी जरूरतें पूरी करना कठिन हो रहा तो अतिथि का सत्कार जेब काटने लगता है। ऐसे में मनुष्य को अतिथि से दूर ही रहना चाहिए।
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