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प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा १८०° देशांतर रेखा जैसी सीधी क्यों नहीं है?
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उत्तर
- अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा पूर्ण रूप से प्रशांत महासागर से ले जाने का प्रयत्न किया गया है।
- यह रेखा किसी द्वीप अथवा किसी भी भूभाग से गुजरती तो वहाँ के लोगों को वार एंव तिथि और पश्चिम भाग में दूसरा वार एंव तिथि दिखाई देती थी।
- सिर्फ भूमि पर चलते समय यह रेखा कब पार की और दिनदर्शिका के अनुसार दिवस कब परिवर्तित हुआ यह समझ में नहीं आता था।
- इसलिए अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा १८०° देशांतर रेखा जैसी सीधी नहीं है।
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भौगोलिक कारण लिखिए:
आज के आधुनिक युग में अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा का महत्त्व है।
भौगोलिक कारण लिखिए:
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निम्नलिखित मार्ग से जाते समय अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लाँघनी पड़ेगी। वह मानचित्र संग्रह के उपयोग से खोजिए तथा दिए गए मानचित्र में दर्शाइए।
मुंबई - लंदन - न्यूयॉर्क - लॉसएंजिलिस - टोकियो।

निम्नलिखित मार्ग से जाते समय अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लाँघनी पड़ेगी। वह मानचित्र संग्रह के उपयोग से खोजिए तथा दिए गए मानचित्र में दर्शाइए।
दिल्ली - कोलकाता - सिंगापुर - मेलबर्न।

नीचे दी गई आकृति में अलग-अलग गोलार्थ में दो चौखटें दी गई हैं। दोनों चौखटों में से अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा जाती है। एक चौखट में देशांतर रेखा, वार और तिथि दी गई हैं, उसके अनुसार दूसरी चौखट के वार और तिथि पहचानिए।

निम्नलिखित मार्ग से जाते समय अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा लाँघनी पड़ेगी। वह मानचित्र संग्रह के उपयोग से खोजिए तथा दिए गए मानचित्र में दर्शाइए।
कोलकाता - हॉगकॉग - टोकियो - सैनफ्रैन्सिस्को।

