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प्रश्न
अंतर स्पष्ट कीजिए:
सार्वजनिक वित्त एवं निजी वित्त
फरक स्पष्ट करा
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उत्तर
| अंतर के बिंदु | सार्वजनिक वित्त | निजी वित्त |
| अर्थ | सार्वजनिक वित्त का संबंध अर्थव्यवस्था या सरकार के राजस्व/आय और व्यय, ऋण (borrowings) आदि से होता है। | निजी वित्त व्यक्तियों, परिवारों और व्यावसायिक फर्मों की आय और व्यय, ऋण आदि का अध्ययन है। |
| समायोजन | सरकार विभिन्न क्षेत्रों पर होने वाले व्यय के आकार के अनुसार अपनी आय का समायोजन करती है। | व्यक्ति अपनी आय के अनुसार अपने खर्चों (व्यय) का समायोजन करते हैं। |
| उद्देश्य | सार्वजनिक वित्त का उद्देश्य समाज को अधिकतम सामाजिक लाभ प्रदान करना होता है। | निजी वित्त का उद्देश्य निजी हितों को पूरा करना होता है। |
| बजट की प्रकृति |
सरकार घाटे के बजट (deficit budget) को प्राथमिकता देती है। | एक व्यक्ति बचत के बजट (surplus budget) को बनाए रखने का प्रयास करता है। |
| वित्तीय लेन-देन |
लेन-देन खुले होते हैं और सभी को ज्ञात होते हैं। | लेन-देन गुप्त रखे जाते हैं। |
| व्यय का निर्धारण |
सरकार पहले अपने व्यय की मात्रा और उसके विभिन्न तरीकों का निर्धारण करती है। | एक व्यक्ति पहले अपनी आय पर विचार करता है और फिर व्यय की मात्रा निर्धारित करता है। |
| मुद्रा छापने का अधिकार | सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से नोट छाप सकती है। | निजी व्यक्ति को मुद्रा छापने का अधिकार नहीं होता है। |
| अर्थव्यवस्था पर प्रभाव |
सार्वजनिक वित्त का देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा (गहरा) प्रभाव पड़ता है। | देश की अर्थव्यवस्था पर निजी वित्त का बहुत कम (सीमित) प्रभाव पड़ता है। |
| वित्त की लोचशीलता |
सार्वजनिक वित्त अधिक लोचदार (more elastic) होता है। | निजी वित्त में बदलाव की बहुत अधिक गुंजाइश नहीं होती है। |
| साख की स्थिति |
बाजार में इसकी साख (credit) का स्तर बहुत ऊंचा होता है। | एक निजी व्यक्ति की साख सीमित होती है। |
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