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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळHSC Commerce (Hindi Medium) 12th Standard Board Exam [कक्षा १२]

अंतर स्पष्ट कीजिए: सार्वजनिक वित्त एवं निजी वित्त

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प्रश्न

अंतर स्पष्ट कीजिए:

सार्वजनिक वित्त एवं निजी वित्त

फरक स्पष्ट करा
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उत्तर

अंतर के बिंदु सार्वजनिक वित्त निजी वित्त
अर्थ सार्वजनिक वित्त का संबंध अर्थव्यवस्था या सरकार के राजस्व/आय और व्यय, ऋण (borrowings) आदि से होता है। निजी वित्त व्यक्तियों, परिवारों और व्यावसायिक फर्मों की आय और व्यय, ऋण आदि का अध्ययन है।
समायोजन सरकार विभिन्न क्षेत्रों पर होने वाले व्यय के आकार के अनुसार अपनी आय का समायोजन करती है। व्यक्ति अपनी आय के अनुसार अपने खर्चों (व्यय) का समायोजन करते हैं।
उद्देश्य सार्वजनिक वित्त का उद्देश्य समाज को अधिकतम सामाजिक लाभ प्रदान करना होता है। निजी वित्त का उद्देश्य निजी हितों को पूरा करना होता है।
बजट की
प्रकृति
सरकार घाटे के बजट (deficit budget) को प्राथमिकता देती है। एक व्यक्ति बचत के बजट (surplus budget) को बनाए रखने का प्रयास करता है।
वित्तीय
लेन-देन
लेन-देन खुले होते हैं और सभी को ज्ञात होते हैं। लेन-देन गुप्त रखे जाते हैं।
व्यय का
निर्धारण
सरकार पहले अपने व्यय की मात्रा और उसके विभिन्न तरीकों का निर्धारण करती है। एक व्यक्ति पहले अपनी आय पर विचार करता है और फिर व्यय की मात्रा निर्धारित करता है।
मुद्रा छापने का अधिकार सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से नोट छाप सकती है। निजी व्यक्ति को मुद्रा छापने का अधिकार नहीं होता है।
अर्थव्यवस्था
पर प्रभाव
सार्वजनिक वित्त का देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा (गहरा) प्रभाव पड़ता है। देश की अर्थव्यवस्था पर निजी वित्त का बहुत कम (सीमित) प्रभाव पड़ता है।
वित्त की
लोचशीलता
सार्वजनिक वित्त अधिक लोचदार (more elastic) होता है। निजी वित्त में बदलाव की बहुत अधिक गुंजाइश नहीं होती है।
साख की
स्थिति
बाजार में इसकी साख (credit) का स्तर बहुत ऊंचा होता है। एक निजी व्यक्ति की साख सीमित होती है।
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