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अभिकथन (A): शुद्ध एथेनॉइक अम्ल को ग्लैशल एसीटिक अम्ल भी कहते हैं। कारण (R): शुद्ध एथेनॉइक अम्ल का निम्न गलनांक 290 K होने के कारण यह शीतऋतु में प्रायः जम जाता है।

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प्रश्न

अभिकथन (A): शुद्ध एथेनॉइक अम्ल को ग्लैशल एसीटिक अम्ल भी कहते हैं।

कारण (R): शुद्ध एथेनॉइक अम्ल का निम्न गलनांक 290 K होने के कारण यह शीतऋतु में प्रायः जम जाता है।

पर्याय

  • अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  • अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) को सही व्याख्या नहीं करता है।

  • अभिकथन (A) सही है, परन्तु कारण (R) गलत है।

  • अभिकथन (A) गलत है, परन्तु कारण (R) सही है।

MCQ
विधान आणि तर्क
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उत्तर

अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

स्पष्टीकरण:

दी गई जानकारी के आधार पर, अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों ही सत्य हैं। शुद्ध एथेनोइक अम्ल का गलनांक लगभग 290 K (17°C) होता है, जिसके कारण यह ठंडी जलवायु में जम जाता है और बर्फ़ जैसे क्रिस्टल बना लेता है; इसी वजह से इसे “ग्लेशियल एसीटिक अम्ल” कहा जाता है। यह कारण बताता है कि इसे “ग्लेशियल” क्यों कहा जाता है।

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