मराठी

‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ नामक पाठ ‘निदा फ़ाज़ली’ द्वारा लिखा गया है। इस पाठ का प्रतिपाद्य है-मनुष्य द्वारा प्रकृति के साथ निरंतर की जा रही छेड़छाड़ की ओर ध्यानाकर्षित कराना, प्रकृति के क्रोध का परिणाम दर्शाना तथा प्रकृति के गुस्से का परिणाम बताते हुए प्रकृति, सभी प्राणियों, पशु-पक्षियों समुद्र पहाड़ तथा पेड़ों के प्रति सम्मान एवं आदर का भाव प्रकट करना। इतना ही नहीं इस धरती पर अन्य जीवों की हिस्सेदारी समझते हुए इसे केवल मनुष्य की ही जागीर न समझना।

लेखक यह बताना चाहता है कि मनुष्य नदी, समुद्र, पहाड़, पेड़-पौधों आदि को अपनी जागीर समझकर उनका मनचाहा उपभोग करता है। इससे प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है। इसके अलावा सभी जीव चाहे मनुष्य हों या कुत्ता उसी एक ईश्वर की रचनाएँ हैं। हमें इनके साथ उदार व्यवहार करना चाहिए।

shaalaa.com
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.6: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 2.6 अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
अतिरिक्त प्रश्न | Q 14

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए −

बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए −
कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए -
लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
‘मट्टी से मट्टी मिले,
खो के सभी निशान,
किसमें कितना कौन है,
कैसे हो पहचान’
इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।


पशु-पक्षी एवं वन्य संरक्षण केंद्रों में जाकर पशु-पक्षियों की सेवा-सुश्रूषा के संबंध में जानकारी प्राप्त कीजिए।


अपने आसपास प्रतिवर्ष एक पौधा लगाइए और उसकी समुचित देखभाल कर पर्यावरण में आए असंतुलन को रोकने में अपना योगदान दीजिए।


किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए जब अपने मनोरंजन के लिए मानव द्वारा पशु-पक्षियों का उपयोग किया गया हो।


मानव-जाति ने किस तरह अपनी बुद्धि से दीवारें खड़ी की हैं?


लेखक की माँ उसे प्रकृति संबंधी उपदेश क्यों दिया करती थी?


'अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले' पाठ के लेखक की माँ उन्हें क्या करने के लिए प्रेरित करती थी?


गद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

प्रकृति में आए असंतुलन के लिए आप किसे जिम्मेदार ठहराते हैं और क्यों? 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले'- पाठ के संदर्भ में लिखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×