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आशय स्पष्ट कीजिए- प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो।

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प्रश्न

आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो।

टीपा लिहा
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उत्तर

उपभोक्तावाद के बढ़ते प्रभाव ने मनुष्य को सुविधाभोगी बना दिया। परन्तु आज सुख-सुविधा का दायरा बढ़कर, समाज में प्रतिष्ठिता बढ़ाने का साधन बन गया है। स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित बनाने के लिए लोग कभी-कभी हँसी के पात्र बन जाते हैं। यूरोप के कुछ देशों में मरने से पहले लोग अपनी कब्र के आस-पास सदा हरी घास, मन चाहे फूल लगवाने के लिए पैसे देते हैं। भारत में भी यह संभव हो सकता है। ऐसी उपभोक्तावादी इच्छा हास्यापद ही है।

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गद्य (Prose) (Class 9 A)
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पाठ 3: उपभोक्तावाद की संस्कृति - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ३९]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 1 [English] Class 9
पाठ 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति
प्रश्न अभ्यास | Q 4.2 | पृष्ठ ३९

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