मराठी

आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f (x t) द्वारा निरूपित की जाती है, जिसमें x तथा t को x – vt अथवा x + vt है अर्थात y = f (x ± vt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f (x t) द्वारा निरूपित की जाती है, जिसमें x तथा t को x – vt अथवा x + vt है अर्थात y = f (x ± vt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है? नीचे दिए गए y के फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि क्या वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है?

(x - υt)2

संख्यात्मक
Advertisements

उत्तर

इसका प्रतिलोम सत्य नहीं है। फलन f(x ± ut) को प्रगामी तरंग निरूपित करने के लिए इस फलन को प्रत्येक क्षण तथा प्रत्येक बिन्दु पर निश्चित तथा परिमित होना चाहिए।

जब x →∞ अथवा t →∞ तो फलन (x – υt)2 अपरिमित हो जाएगा; अत: यह फलन प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं कर सकता।

shaalaa.com
प्रगामी तरंग की चाल - अनुदैर्घ्य तरंग की चाल - ध्वनि की चाल
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 14: तरंगें - अभ्यास [पृष्ठ ४०६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Bhautiki Bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
पाठ 14 तरंगें
अभ्यास | Q 15.5 (a) | पृष्ठ ४०६

संबंधित प्रश्‍न

आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f (x t) द्वारा निरूपित की जाती है, जिसमें x तथा t को x – υt अथवा x + υt है अर्थात y = f (x ± υt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है? नीचे दिए गए y के  फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि क्या वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है:

`"log"[(x + upsilon"t")/x_0]`


सूत्र `upsilon = sqrt("yP"/rho)` का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों दाब पर निर्भर नहीं करती?


सूत्र `upsilon = sqrt("yP"/rho)` का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों ताप के साथ बढ़ जाती है?


100 cm लंबी स्टील-छड़ अपने मध्य बिंदु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्घ्य कंपनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?


स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे):

वायलिन तथा सितार के स्वरों की आवृत्तियाँ समान होने पर भी हम दोनों से उत्पन्न स्वरों में भेद कर लेते हैं।


स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे):

ठोस अनुदैर्घ्य तथा अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का पोषण कर सकते हैं जबकि गैसों में केवल अनुदैर्घ्य तरंगें ही संचरित हो सकती है।


स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे):

परिक्षेपी माध्यम में संचरण के समय स्पन्द की आकृति विकृत हो जाती है।


रेलवे स्टेशन के बाह्य सिगनल पर खड़ी कोई रेलगाड़ी शान्त वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजाती है।

  1. प्लेटफॉर्म पर खड़े प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति क्या होगी जबकि रेलगाड़ी
    (a) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म की ओर गतिशील है, तथा
    (b) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है?
  2. दोनों ही प्रकरणों में ध्वनि की चाल क्या है? शान्त वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 लीजिए।

स्टेशन यार्ड में खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजा रही है। तभी 10 ms-1 चाल से यार्ड से स्टेशन की ओर वायु बहने लगती है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए ध्वनि की आवृत्ति, तरंगदैर्घ्य तथा चाल क्या हैं? क्या यह स्थिति तथ्यतः उस स्थिति के समरूप है जिसमें वायु शांत हो तथा प्रेक्षक 10 ms-1 चाल से यार्ड की ओर दौड़ रहा हो? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 ले सकते हैं।


80 × 10-3 kg m-1 रैखिक द्रव्यमान घनत्व की किसी लंबी डोरी का एक सिरा 256 Hz आवृत्ति के विद्युत चालित स्वरित्र द्विभुज से जुड़ा है। डोरी का दूसरा सिरा किसी स्थिर घिरनी के ऊपर गुजरता हुआ किसी तुला के पलड़े से बँधा है जिस पर 90 kg के बाट लटके हैं। घिरनी वाला सिरा सारी आवक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है जिसके कारण इस सिरे से परावर्तित तरंगों का आयाम नगण्य होता है। t = 0 पर डोरी के बाएँ सिरे। (द्विभुज वाले सिरे) x = 0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन शून्य है (y = 0) तथा वह y-अक्ष की धनात्मक दिशा के अनुदिश गतिशील है। तरंग का आयाम 5.0 cm है। डोरी पर इस तरंग का वर्णन करने वाले अनुप्रस्थ विस्थापन y को x तथा t के फलन के रूप में लिखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×