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आपने पढ़ा कि राजा जनक की सभा में उपस्थित विभिन्न पात्रों की मनःस्थिति अलग-अलग है। नीचे दिए गए भावों/मन:स्थिति को दर्शाने वाली पंक्तियों को कविता से चिह्नित कीजिए और बताइए

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प्रश्न

आपने पढ़ा कि राजा जनक की सभा में उपस्थित विभिन्न पात्रों की मनःस्थिति अलग-अलग है। नीचे दिए गए भावों/मन:स्थिति को दर्शाने वाली पंक्तियों को कविता से चिह्नित कीजिए और बताइए कि यह भाव किस पात्र से संबंधित है और उसकी इस मनःस्थिति का कारण क्या है? आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

चिंता, क्रोध, व्यग्रता, भय, संयम/विनम्रता, ईर्ष्या/कुटिलता

भाव/मेन:स्थिति संबंधित पंक्ति संबंधित पात्र मन:स्थिति का कारण
चिंता बिधि अब सँवरी बात बिगारी सीता की माता सुनयना पुत्री सीता के भविष्य (विवाह) केप्रति आशंकित और चिंतित
सविस्तर उत्तर
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उत्तर

भाव/मेन:स्थिति संबंधित पंक्ति संबंधित पात्र मन:स्थिति का कारण
चिंता बिधि अब सँवरी बात बिगारी सीता की माता सुनयना पुत्री सीता के भविष्य (विवाह) केप्रति आशंकित और चिंतित
क्रोध बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू।
उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।।
 परशुराम अपने आराध्य शिव के धनुष के टूटने पर अत्यंत क्रोधित हो जाना
व्यग्रता अरध निमेष कलप सम बीता।। सीता परशुराम के गुस्से के कारण बेचैन और परेशान हो गई
भय पितु समेत कहि कहि निज नामा।
लगे करन सब दंड – प्रनामा।।
सभी भयभीत राजा परशुराम का लाल हुआ माथा, क्रोध से भरी आँखें, डरावना रूप और उनका भय उत्पन्न करने वाला इतिहास
संयम/विनम्रता नाथु संभुधनु भंजनिहारा।
होइहि केउ एक दास तुम्हारा।
राम क्रोधित परशुराम को शांत करने की कोशिश करना
ईर्ष्या/कुटिलता कुटिल भूप हरषे मन माहीं। कुटिल पराजित राजा परशुराम द्वारा धनुष तोड़ने वाले को सजा देने की घोषणा करना
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पाठ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - अभ्यास [पृष्ठ १५८]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
पाठ 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १५८
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