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प्रश्न
आपके विचार से महिलाओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा कि वे क्या कर सकती हैं और क्या नहीं, उनके समानता के अधिकार को कैसे प्रभावित करती है?
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
हमारे विचार में महिलााओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा उनके समानता के अधिकार को निम्न प्रकार से प्रभावित करती हैं।
- अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लड़िकयाँ उतनी ही शिक्षा प्राप्त क्र पाती हैं जितनी सुविधा उनके गाँव में उपलब्ध होती है। उन्हें प्रायः आगे की शिक्षा प्राप्त करने दूसरे गाँव अथवा शहर नहीं भेजा जाता है।
- अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पूँघट प्रथा,लड़कियाँ की उम्र में शादी करना, लड़कियों को चारदीवारी तक सीमित रखना आदि प्रथा प्रचलित है। अधिकांश परिवारों में लड़कियों के स्कूली शिक्षा पूरी हो जाने के बाद उनकी शादी क्र दी जाती है।
- अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में या अशिक्षित परिवारों या रूढ़िवादी परिवारों में लड़कियों को पराया धन मानकर परवरिश की जाती है और लड़को को वंश चलाने वाला माना जाता है, इसलिए उनकी परवरिश लड़कियों से बेहतर की जाती है।
- अधिकांश लोग अभी भी यह मानते हैं कि लड़कियों का मुख्य कार्य भावी परिवार के उत्तरदायित्व की निभाना है, जिसके लिए उच्च शिक्षा के स्थान पर अन्य कार्यों; जैसे-पाककला, सिलाई-बुनाई आदि की अधिक आवश्यकता होती है।
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महिला आंदोलन
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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