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आप एक फर्म की ऋणशोधन क्षमता का अध्ययन कैस करेंगे ?

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प्रश्न

आप एक फर्म की ऋणशोधन क्षमता का अध्ययन कैस करेंगे ?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

वे व्यक्ति जो व्यवसाय में अग्रिम धन दीर्घकालिक आधार पर लगाते हैं उन्हें आवधिक ब्याज के भुगतान की सुरक्षा में रुचि के साथ-साथ, ऋण अवधि की समाप्ति पर मूलधन की राशि के पुनर्भुगतान की चिंता भी रहती है। ऋण शोधन क्षमता अनुपात का परिकलन व्यवसाय द्वारा दीर्घकाल में ऋण चुकाने की क्षमता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। व्यवसाय की ऋण शोधन क्षमता के मूल्यांकन हेतु सामान्यतः निम्नलिखित अनुपातों को परिकलित किया जाता है-

  1. ऋण समता अनुपात -
    ऋण समता अनुपात दीर्घकालिक ऋण और समता के बीच संबंध को मापता है। यदि कुल दीर्घकालिक निधियों में ऋण संघटक लघु हैं तो बाहरी लोग अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अधिक समता तथा कम ऋण का पूँजी ढाँचा अधिक अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह दिवालियेपन के अवसर घटा देता है।
    ऋण समता अनुपात = `"दीर्घकालिक ऋण"/"अंशधारक निधि"`

  2. ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात -
    ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात दीर्घकालिक ऋण हेतु कुल बाहरी एवं आंतरिक निधियों (नियोजित पूँजी या निवल परिसंपत्तियों) के अनुपात को संदर्भित करता है। इसे निम्नवत्‌ परिकलित करते हैं- 
    ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात = `"दीर्घकालिक ऋण"/ ("नियोजित पूँजी"("निवल परिसंपत्तियाँ"))`

  3. स्वामित्व अनुपात -
    स्वामित्व अनुपात स्वामी (अंशधारक) निधि और निवल परिसंपत्तियों के मध्य संबंधों को व्यक्त करता है और इसे निम्नवत्‌ परिकलित्‌ किया जाता है।
    स्वामित्व अनुपात = `"अंशधारक निधि"/"नियोजित पूँजी (या निवल परिसंपत्तियाँ)"`
  4. कुल परिसंपत्तियों पर ऋण अनुपात -
    यह अनुपात परिसंपत्तियों के द्वारा दीर्घकालिक ऋण की संरक्षण की व्यापकता को मापता है। इसे इस तरह 'परिकलित किया जाता है।

    कुल परिसंपत्तियों पर ऋण अनुपात  = `"कुल परिसंपत्तियाँ"/" दीर्घकालिक ऋण"`
    यह अनुपात मुख्यतः परिसंपत्तियों के वित्त हेतु बाह्य निधियों की दर को संकेत करता है और परिसंपत्तियों द्वारा ऋण के संरक्षण को दर्शाता है।

  5. ब्याज व्याप्ति अनुपात -
    यह वह अनुपात है जो ऋणों पर ब्याज की उपयुक्तता को दर्शाता हैं। यह दीर्घकालिक ऋणों पर देय ब्याज की सुरक्षा का मापक है। यह ब्याज के भुगतान हेतु उपलब्ध लाभ और देय ब्याज की राशि के बीच संबंध को दर्शाता है। इसे निम्नवत्‌ परिकलित किया जाता है-
    ब्याज व्यष्ति अनुपात = `"ब्याज व कर देने से पूर्व निवल लाभ"/"दीर्घकालिक ऋणों पर ब्याज"`
    यह अनुपात प्रकट करता है कि दीर्घकालिक ऋणों पर ब्याज के लिए लाभों में से उपलब्धता संभव हो सकती है।
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अनुपात विश्लेषण के सीमाएँ
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 5: लेखांकन अनुपात - अभ्यास हेतु प्रश्न [पृष्ठ २४०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Lekhashastra Company Khate evam Vittiya Vivaranon ka Vishleshan [Hindi] Class 12
पाठ 5 लेखांकन अनुपात
अभ्यास हेतु प्रश्न | Q ख. 2. | पृष्ठ २४०
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