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प्रश्न
“आज की पिकनिक, मजा आ गया। सोचा भी न था कि इतना....” इस पंक्ति से शुरुआत करते हुए लघु-कथा को लगभग 100 शब्दों में पूरा कीजिए।
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उत्तर
एक बार मेरे मित्र ने बताया था कि पार्क में पिकनिक मनाने में बहुत आनंद आता है, क्योंकि वह स्वयं अपने दोस्तों के साथ वहाँ गया था। उसकी बात सुनकर मैंने अपने माता-पिता को भी पिकनिक पर जाने के लिए मनाया। सुरक्षा को लेकर मेरा परिवार पहले तैयार नहीं था, लेकिन मेरी जिद के आगे उन्हें मानना पड़ा। वे सामान्यतः पर्वतीय क्षेत्रों या विदेश यात्रा को ही पसंद करते थे, पर मेरे आग्रह पर उन्होंने मेरी बात स्वीकार कर ली। सुबह आठ बजे हम एक बड़े पार्क पहुँचे। मार्च का मौसम अत्यंत सुहावना था। चारों ओर हरियाली और फूलों की सुंदरता देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया, क्योंकि मैंने ऐसी सुंदरता की कल्पना भी नहीं की थी। सोचा भी न था कि इतना सुंदर दृश्य होगा। कुछ समय तक हम खेले। खेलने के बाद भूख लगी तो हम माँ के पास गए, जहाँ उन्हें योगा करते हुए देखकर हम चकित हो गए। हमने उन्हें परेशान नहीं किया और चुपचाप भोजन करके फिर खेलने लगे। रविवार होने के कारण पार्क में काफी भीड़ थी। तभी मेरी नजर एक रोते हुए बच्चे पर पड़ी, जो अपनी माँ को खोज रहा था। मैंने उसे शांत किया, कुछ खाने को दिया और पानी पिलाया। थोड़ी देर में उसकी माँ वहाँ आ गई और उसने मुझे धन्यवाद दिया। इसी बीच मेरे पिता भी आ गए। मेरे इस व्यवहार से वे बहुत प्रसन्न हुए। इस पिकनिक का उन्हें इतना आनंद आया कि उन्होंने हर रविवार यहाँ आने का निश्चय कर लिया।
